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Uttarakhand Minning- मानसून की दस्तक से थमा खनन, टूट गए कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड - Him Varta

Uttarakhand Minning- मानसून की दस्तक से थमा खनन, टूट गए कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड

Uttarakhand Minning- उत्तराखंड में मानसून सीजन के आगमन के साथ ही रामनगर की लाइफलाइन कही जाने वाली कोसी और दाबका नदी में पिछले सात महीनों से जारी खनन कार्य पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हालांकि, नदियों के शांत होने से पहले इस बार के खनन सत्र ने सरकार के राजस्व के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस वित्तीय वर्ष में रामनगर से सरकार को उपखनिज निकासी के जरिए बंपर कमाई हुई है, जिसने आर्थिक मोर्चे पर पिछले सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है।

  • 7 महीने बाद लगी रोक: मानसून की सक्रियता और पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए कोसी और दाबका नदी में खनन कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
  • राजस्व में भारी उछाल: इस वित्तीय वर्ष में सरकार को कुल 9,79,19,791 रुपये का बंपर राजस्व प्राप्त हुआ है।
  • 19 दिन अतिरिक्त चला काम: अमूमन 31 मई को बंद होने वाला खनन कार्य इस बार विस्तारित होकर 19 जून तक संचालित किया गया।
  • वन विकास निगम का प्रबंधन: तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन आने वाली इन दोनों नदियों से उपखनिज (रेत-बजरी) निकासी का कार्य वन विकास निगम द्वारा संपन्न कराया गया।

Uttarakhand Minning- पिछले साल के मुकाबले 46% अधिक कमाई

  • तराई पश्चिमी वन प्रभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल के राजस्व संग्रह में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है:
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोसी और दाबका नदी से सरकार को 4,54,54,858 रुपये की आय हुई थी।
  • वहीं, इस नए वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा सीधे बढ़कर 9,79,19,791 रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक है।

Uttarakhand Minning- 6 प्रमुख गेटों से हुई रिकॉर्ड निकासी

Uttarakhand Minning- रामनगर क्षेत्र में कुल 6 प्रमुख द्वारों (गेट्स) से राजस्व की यह रिकॉर्ड बारिश हुई है। इसमें कोसी नदी के पांच और दाबका नदी का एक गेट शामिल है:

  • कोसी नदी के 5 गेट: कालूसिद्ध, बंजारी प्रथम, बंजारी द्वितीय, खड़ंजा और कठियापुल।
  • दाबका नदी का 1 गेट: छोई गेट।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार:

“इस वर्ष मौसम के अनुकूल रहने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए खनन की अवधि को 31 मई के स्थान पर 19 जून तक बढ़ाया गया था। इसी अतिरिक्त समय और पारदर्शी व्यवस्था के कारण सरकार को यह बंपर राजस्व हासिल हुआ है। अब सुरक्षा मानकों के तहत अगले सीजन के लिए गेट बंद कर दिए गए हैं।”

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