Reverse Migration Uttarakhand- पलायन से घर वापसी तक, उत्तराखंड के गांवों में नई शुरुआत

Reverse Migration Uttarakhand- पहाड़ों से शहरों की ओर हुआ दशकों पुराना पलायन अब धीरे-धीरे उल्टा रुख लेने लगा है, उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में रहने वाले कई प्रवासी, जो देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुके थे, अब अपने मूल गांवों की ओर लौटकर खेती, बागवानी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नई शुरुआत कर रहे हैं, पलायन निवारण आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक छह हजार से अधिक प्रवासी अपने गांव वापस लौट चुके हैं और स्वरोजगार के जरिए आजीविका स्थापित कर रहे हैं।

इस सकारात्मक बदलाव को देखते हुए पलायन निवारण आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव देने की तैयारी शुरू कर दी है कि घर वापसी करने वाले प्रवासियों के लिए रोजगार और निवेश संबंधी नीतियों को और सरल और अनुकूल बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग पहाड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित हों।

आयोग के विश्लेषण में सामने आया है कि बड़ी संख्या में प्रवासी अपने पैतृक गांव या आसपास के क्षेत्रों में लौटने की इच्छा रखते हैं, लेकिन जटिल नियम, निवेश प्रक्रिया की कठिनाइयां और बैंक ऋण से जुड़ी सख्त शर्तें उनकी राह में बाधा बन रही हैं। ऐसे में नीति स्तर पर बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।

पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी के अनुसार, आयोग जल्द ही सरकार को यह सुझाव देगा कि सभी जिलों में जिलाधिकारी (DM) स्तर पर सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए। इससे घर वापसी करने वाले प्रवासियों को सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधाओं और स्वरोजगार के अवसरों की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।

Reverse Migration Uttarakhand

Reverse Migration Uttarakhand- इसके साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा जा रहा है कि प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी हर महीने प्रवासियों के साथ संवाद करें, ताकि उनकी समस्याओं को सीधे समझकर समाधान किया जा सके। आयोग का मानना है कि यह पहल नीति और जमीन के बीच की दूरी को कम करेगी।

सरकार पहले से ही गांवों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और आजीविका विकास पर जोर दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ-साथ अब फोकस रोजगार सृजन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर भी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रवासियों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाए, तो वे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकते हैं। कई प्रवासी पहले ही खेती, जैविक उत्पाद, होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन में सफल मॉडल स्थापित कर चुके हैं।

Reverse Migration Uttarakhand- डॉ. एसएस नेगी ने कहा कि प्रवासी केवल अनुभव और तकनीक ही नहीं, बल्कि नई सोच भी साथ लेकर आते हैं। यदि उन्हें सही माहौल और सहयोग मिले, तो पहाड़ों के गांवों में फिर से आर्थिक और सामाजिक रौनक लौट सकती है। आयोग जल्द ही अपनी विस्तृत सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, जिससे पलायन रोकने और घर वापसी को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस नीति बनाई जा सके।

 

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