Helang Marwari Bypass- बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर हर साल लगने वाले लंबे जाम से राहत दिलाने के लिए तैयार किया जा रहा हेलंग-मारवाड़ी बाईपास अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है हालांकि, मारवाड़ी क्षेत्र में निर्माण योजना में बदलाव के कारण इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में अभी एक से डेढ़ साल का समय और लग सकता है। बाईपास शुरू होने के बाद बदरीनाथ धाम की यात्रा न केवल सुगम होगी, बल्कि यात्रियों को लगभग 36 किलोमीटर कम दूरी भी तय करनी पड़ेगी।
करीब छह किलोमीटर लंबे इस हेलंग-मारवाड़ी बाईपास का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का अधिकांश हिस्सा तैयार हो चुका है और सड़क पर कटिंग के साथ डामरीकरण का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। लेकिन मारवाड़ी की ओर करीब 300 मीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य अब भी अटका हुआ है।
जानकारी के अनुसार, इस हिस्से में नीचे अलकनंदा नदी बहती है और पहाड़ी चट्टानों के कारण निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण है। शुरुआत में यहां आरसीसी गार्डर पुल बनाने की योजना थी, लेकिन भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे को देखते हुए इसे बदल दिया गया। अब इस स्थान पर अर्थवाल निर्माण की नई कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है, जिसे विशेषज्ञ अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
Helang Marwari Bypass- वर्तमान में हेलंग से ज्योतिर्मठ होते हुए मारवाड़ी तक की दूरी लगभग 24 किलोमीटर है, जहां भारी चढ़ाई और उतार यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाते हैं। बाईपास बनने के बाद वाहनों को ज्योतिर्मठ शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे यात्रा समय और ट्रैफिक दबाव दोनों में कमी आएगी। यह सड़क सेना की सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी विकसित की जा रही है।

बीआरओ अधिकारियों के अनुसार, सड़क के दोनों ओर कटिंग का कार्य पूरा हो चुका है और हेलंग की तरफ डामरीकरण भी कर दिया गया है। अब केवल बीच का संवेदनशील हिस्सा बाकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस सड़क की शुरुआती योजना 1980 के दशक में विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना के लिए मशीनें पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। उस समय सिंगल कटिंग भी की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और कानूनी विवादों के चलते परियोजना दशकों तक अधर में लटकी रही।
स्थानीय नागरिकों का मानना था कि यदि यात्री सीधे बाईपास से गुजरने लगेंगे तो ज्योतिर्मठ के पर्यटन और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसी कारण लंबे समय तक इसका विरोध होता रहा।
सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल अंकुर महाजन ने बताया कि हेलंग-मारवाड़ी बाईपास का निर्माण तेजी से चल रहा है और सुरक्षा कारणों से पुल निर्माण की योजना में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना को पूरी तरह चालू होने में अभी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।
Helang Marwari Bypass- वहीं, चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि मारवाड़ी से ज्योतिर्मठ तक हाईवे चौड़ीकरण में हो रही देरी को लेकर बीआरओ अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। फिलहाल यात्रा सीजन में जाम की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के साथ समन्वय बनाकर गेट सिस्टम के जरिए वाहनों की आवाजाही कराने का निर्णय लिया गया है।