Gharial Conservation- गंगा बेसिन की 13 नदियों में 3037 घड़ियाल

Gharial Conservation- अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल के अस्तित्व को लेकर बनी चुनौतियों के बीच गंगा बेसिन से एक अहम तस्वीर सामने आई है। गंगा बेसिन में आने वाली 13 नदियों में कुल 3037 घड़ियाल पाए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या चंबल नदी में दर्ज की गई है। उत्तराखंड की बात करें तो रामगंगा नदी में 48 घड़ियालों की मौजूदगी रिपोर्ट हुई है।

यह जानकारी गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति और संरक्षण कार्ययोजना को लेकर जारी ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है। यह सर्वेक्षण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा नवंबर 2020 से मार्च 2023 के बीच किया गया।

Gharial Conservation- सर्वे के दौरान गंगा बेसिन की 22 नदियों में करीब 7680 किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन किया गया, जिसमें से 13 नदियों में 3037 घड़ियाल (हेड काउंट) दर्ज किए गए। आंकड़ों के अनुसार, चंबल नदी में सबसे अधिक 2097 घड़ियाल, घाघरा नदी में 463 और गिरवा नदी में 158 घड़ियाल पाए गए हैं। उत्तराखंड में घड़ियालों की मौजूदगी केवल कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व क्षेत्र से गुजरने वाली रामगंगा नदी तक सीमित पाई गई।

सर्वे और अध्ययन से जुड़े बायोलॉजिस्ट आशीष पांडा ने बताया कि घड़ियाल बेहद विशिष्ट परिस्थितियों में ही जीवित रह पाते हैं। उनके लिए उपयुक्त तापमान, साफ और शांत जल, तथा कम मानवीय हस्तक्षेप आवश्यक होता है। घड़ियाल चयनित आहार ग्रहण करते हैं और डिस्टरबेंस बिल्कुल पसंद नहीं करते, यही कारण है कि उनका अस्तित्व लगातार खतरे में बना हुआ है।

Gharial Conservation- घड़ियाल संरक्षण के सामने प्रमुख चुनौतियों में नदी तल से रेत का खनन, मछली पकड़ने के जालों का नदियों में छोड़ा जाना, जिनमें फंसकर घड़ियालों की मौत हो जाती है, तथा नदियों में बढ़ता प्रदूषण शामिल है।

Gharial Conservation- रिपोर्ट में घड़ियाल संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण संस्तुतियां भी की गई हैं। इनमें एक विशेष टास्कफोर्स के गठन का सुझाव दिया गया है, जिसके अंतर्गत घड़ियाल संरक्षण से जुड़ी सभी संस्थाएं समन्वय के साथ कार्य करें। इसके साथ ही मछली पकड़ने के जाल नदी में न फेंकने को लेकर जागरूकता अभियान, तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से घड़ियालों पर सतत अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदूषण का स्तर कम किया जाए और नदी पारिस्थितिकी में सुधार हो, तो भविष्य में सोन, कोसी और गंडक जैसी नदियों में भी घड़ियालों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

Gharial Conservation- इस अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान की संकाय अध्यक्ष डॉ. रुचि बडोला, डॉ. शिवानी बर्थवाल, डॉ. एस.ए. हुसैन सहित कई विशेषज्ञ शामिल रहे।

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