Uttarakhand Census- घर बैठे जनगणना का मौका, 15-20 मिनट में पूरा होगा काम

Uttarakhand Census- आगामी जनगणना को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है, पहली बार नागरिकों को घर बैठे ही अपना विवरण भरने की सुविधा दी जा रही है, जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत 10 अप्रैल से ऑनलाइन स्व-गणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया आसान, तेज और डिजिटल हो जाएगी।

उत्तराखंड में यह सुविधा 10 अप्रैल से आधिकारिक पोर्टल (https://se.census.gov.in) पर उपलब्ध होगी, नागरिकों को वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य का चयन करना होगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी भरनी होगी, विशेषज्ञों का कहना है कि घर की सटीक लोकेशन मैप पर चिन्हित करने के लिए लैपटॉप या डेस्कटॉप का उपयोग अधिक सुविधाजनक रहेगा।

स्व-गणना के लिए परिवार के मुखिया का नाम और एक मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक मोबाइल नंबर केवल एक ही परिवार के लिए मान्य होगा और पंजीकरण के समय दर्ज किया गया नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा। साथ ही, भाषा चयन भी सावधानीपूर्वक करना होगा, क्योंकि ओटीपी सत्यापन के बाद इसे बदला नहीं जा सकेगा।

Uttarakhand Census- इस प्रक्रिया की सबसे खास विशेषता इंटरएक्टिव मैपिंग है, जिसमें नागरिकों को स्क्रीन पर दिख रहे लाल मार्कर को खींचकर अपने घर की सटीक लोकेशन तय करनी होगी। इससे जनगणना प्रगणकों को बाद में डाटा सत्यापन में आसानी होगी। पूरी जानकारी भरने के बाद सिस्टम 11 अंकों की एक विशेष स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) जारी करेगा, जो एसएमएस और ईमेल के माध्यम से भी भेजी जाएगी।

Uttarakhand Census

जब जनगणना प्रगणक घर पहुंचेगा, तो नागरिकों को केवल अपनी SE ID दिखानी होगी। यदि यह आईडी रिकॉर्ड से मेल खाती है, तो दोबारा विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, आईडी मेल न खाने की स्थिति में प्रगणक को पुनः जानकारी एकत्र करनी पड़ सकती है।

नागरिक अंतिम सबमिशन से पहले अपने डेटा को ड्राफ्ट के रूप में सेव कर सकते हैं, लेकिन एक बार सबमिट करने के बाद उसमें कोई बदलाव संभव नहीं होगा। भवन संख्या और जनगणना मकान संख्या जैसी तकनीकी जानकारियां प्रगणक द्वारा ही भरी जाएंगी।

Uttarakhand Census- जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, यह प्रक्रिया बेहद सरल और समय बचाने वाली है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक नागरिक इस डिजिटल स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लें, ताकि जनगणना का पहला चरण सुगम और प्रभावी बनाया जा सके।

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