Winter Char Dham Yatra
Winter Char Dham Yatra- पंचकेदार गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में गुरुवार को शीतकालीन यात्रा का विधिवत मंत्रोच्चारण और वैदिक अनुष्ठानों के साथ अत्यंत भव्य शुभारंभ किया गया। यात्रा प्रारंभ होने से पहले जीएमवीएन ऊखीमठ परिसर से मंदिर तक महिला मंगल दल, युवा मंगल दल और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-दमाऊं और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे मार्ग को आध्यात्मिक रंगों में रंग दिया। यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
Winter Char Dham Yatra- मंदिर प्रांगण में पूजा-अर्चना
मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। कार्यक्रम में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, बदरी–केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, तथा जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने विधिवत पूजा-अर्चना कर शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ किया।
पूजा-अर्चना के दौरान जिलाधिकारी प्रतीक जैन द्वारा भावपूर्ण स्वर में प्रस्तुत किए गए शिव भजनों
- “शिव कैलासों के वासी, धौलीधारों के राजा…”,
- “तेरे कैलासों का अंत ना पाया…”,
ने वातावरण को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया। उपस्थित भक्तों ने ताल और स्वर के साथ भजनों में सहभागिता निभाई।
Winter Char Dham Yatra- सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त: जिलाधिकारी
डीएम जैन ने बताया कि शीतकालीन यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियाँ पहले से ही पूरी कर ली हैं।
उन्होंने कहा “सड़क, पेयजल, विद्युत, पार्किंग और सुरक्षा इंतज़ामों को पूरी तरह दुरुस्त किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि शीतकालीन यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलता है, जिससे होटल, परिवहन, दुकानों और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों की आजीविका सुदृढ़ होती है।
Winter Char Dham Yatra- सांस्कृतिक धरोहर और आस्था का संगम
- कलश यात्रा के साथ स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की भव्य प्रस्तुति दिखी—
- महिलाएँ पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत गाती हुई
- छात्र-छात्राएँ केदारघाटी की संस्कृति प्रदर्शित करते हुए
- ढोल-दमाऊं की थाप पर चलते श्रद्धालु
Winter Char Dham Yatra- मंदिर प्रांगण में आयोजित कीर्तन में कीर्तन मंडल ने भावपूर्ण रचनाएँ पेश कर माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया।
