Uttarakhand Teachers CTET- उत्तराखंड में गलत तथ्यों और हेरफेर के सहारे केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) पास करने की कोशिश में जुटे शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ा हंटर चलाया है। हाल ही में मीडिया में इस पूरे खेल का खुलासा होने के बाद विभाग ने तुरंत एक्शन लिया है। शासन के सख्त रुख को देखते हुए ऐसे शिक्षकों को परीक्षा में बैठने के लिए पूर्व में जारी की गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से स्थगित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
इस पूरे मामले, सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश और विभाग की कार्रवाई से जुड़ी हर एक बड़ी बात नीचे विस्तार से दी गई है:
Uttarakhand Teachers CTET- क्या है पूरा मामला?
- सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद वर्तमान में नौकरी कर रहे कई शिक्षकों पर अपनी सर्विस और प्रमोशन बचाने का संकट मंडरा रहा है। इसी घबराहट में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक भी CTET के लिए आवेदन कर रहे हैं, जो मौजूदा नियमों के तहत इसके लिए पात्र (Eligible) ही नहीं हैं।
- तथ्यों की हेरफेर: साल 2010 से पहले नियुक्त हुए कई शिक्षक जो असल में B.Ed. (बीएड) धारक हैं, उन्होंने विभाग से किसी तरह NOC ले ली। इसके बाद सीबीएसई (CBSE) के पोर्टल पर आवेदन करते समय खुद को B.T.C. (बीटीसी) या D.El.Ed. (डीएलएड) दर्शा दिया, ताकि वे परीक्षा में बैठ सकें।
- अधिकारियों की लापरवाही: विभाग के संज्ञान में आया है कि ब्लॉक या उप शिक्षा अधिकारी स्तर से इन शिक्षकों की वास्तविक अर्हता (योग्यता) की गहन जांच किए बिना ही फाइलें आगे बढ़ा दी गईं।

Uttarakhand Teachers CTET- क्यों मची है शिक्षकों में खलबली?
- शिक्षकों के बीच इस अफरातफरी की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला है, जिसने नौकरी और प्रमोशन के नियम बेहद कड़े कर दिए हैं:
- TET अनिवार्य: कोर्ट ने साफ किया है कि कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य है।
- 31 अगस्त 2028 तक की डेडलाइन: अपनी नौकरी सुरक्षित रखने और भविष्य में पदोन्नति (Promotion) पाने के लिए इन शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में TET/CTET परीक्षा पास करनी होगी।
- किन्हें मिली है छूट?: इस कड़े नियम से केवल उन बुजुर्ग शिक्षकों को राहत दी गई है, जिनकी सरकारी सेवा (नौकरी) के 5 साल या उससे कम बचे हैं। बाकी सभी के लिए यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
Uttarakhand Teachers CTET- बाकी जिलों में भी हड़कंप
इस मामले में सबसे पहले जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) हरिद्वार, अमित कुमार चंद ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी कर दिए हैं।
डीईओ आदेश के मुख्य बिंदु:
- सीटीईटी प्रथम व द्वितीय के लिए विभिन्न तिथियों में जारी की गईं सभी एनओसी (NOC) अगले आदेश तक स्थगित की जाती हैं।
- उप शिक्षा अधिकारियों ) को निर्देशित किया गया है कि वे केवल पूरी तरह पात्र और योग्य शिक्षकों के मामलों की ही दोबारा से जांच और संस्तुति करके रिपोर्ट कार्यालय को भेजें।
- हरिद्वार के अलावा प्रदेश के कुछ अन्य जिलों में भी ठीक इसी तरह गलत तथ्यों के आधार पर आवेदन करने की शिकायतें सामने आई हैं, जिसके बाद पूरे उत्तराखंड के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और बाकी जिलों में भी ऐसी एनओसी पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है।