Uttarakhand Census 2026- उत्तराखंड में जनसंख्या और शहरी विस्तार की रफ्तार अब जनगणना के शुरुआती आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगी है, राज्य में जनगणना के पहले चरण यानी मकान सूचीकरण और मकान गणना का काम पूरा होने के बाद जो अनुमान सामने आए हैं, उनके मुताबिक पिछले करीब 15 वर्षों में प्रदेश की आबादी में लगभग 28 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना में उत्तराखंड की कुल आबादी एक करोड़ 86 हजार दर्ज की गई थी, जबकि इस बार पहले चरण में जनगणना टीमों की पहुंच करीब एक करोड़ 28 लाख लोगों तक हो चुकी है, इससे राज्य में तेजी से बढ़ती आबादी और विस्तार का संकेत मिल रहा है।
सिर्फ आबादी ही नहीं, भवनों और परिवारों की संख्या में भी बड़ा इजाफा देखा गया है, वर्ष 2011 में प्रदेशभर में 33 लाख 83 हजार 410 भवन सूचीबद्ध किए गए थे, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 45 लाख तक पहुंच गया है, यानी भवनों की संख्या में लगभग 12 लाख की बढ़ोतरी हुई है।
परिवारों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि सामने आई है, 2011 की गणना में राज्य में 19 लाख 97 हजार 68 परिवार दर्ज थे, जो अब बढ़कर करीब 28 लाख 30 हजार हो गए हैं। यानी प्रदेश में लगभग आठ लाख नए परिवार जुड़े हैं, हालांकि ये अभी शुरुआती आंकड़े हैं और आधिकारिक अंतिम रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी।

जनगणना विभाग के अनुसार, सितंबर महीने में राज्य के करीब 120 हिमाच्छादित क्षेत्रों में विशेष जनगणना अभियान चलाया जाएगा, ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सर्दियों के दौरान इन क्षेत्रों के लोग अन्य जगहों पर पलायन कर जाते हैं, इसके बाद पूरे राज्य में 10 फरवरी से 28 फरवरी के बीच एक साथ जनगणना की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होगी।
Uttarakhand Census 2026- विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से राज्य में बढ़ते शहरीकरण, पलायन और बुनियादी सुविधाओं की बढ़ती जरूरतों का भी स्पष्ट संकेत मिलता है।