Uttarakhand Barani Krishi Yojana- उत्तराखंड के कृषि परिदृश्य को गहराई से समझें तो राज्य के कुल 95 विकासखंडों (ब्लॉक्स) में से 71 विकासखंड ऐसे हैं जहां सिंचाई के पुख्ता साधन नहीं हैं और खेती पूरी तरह से बादलों की मर्जी पर टिकी है। इसी को व्यावहारिक भाषा में बारानी कृषि कहा जाता है।
ग्लोबल वॉर्मिंग और बदलते मौसम चक्र के कारण समय पर बारिश न होने से पहाड़ों में पलायन और खेती छोड़ने की मजबूरी बढ़ती जा रही थी। हालात यहां तक पहुंच जाते थे कि कई बार किसानों के पास अगली फसल बोने के लिए बुनियादी बीज तक नहीं बचता था। इसी संकट को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए यह योजना लाई गई है।
Uttarakhand Barani Krishi Yojana- 1000 करोड़ का महा-प्लान
यह परियोजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बेहद व्यवस्थित तरीके से ग्रामीण अंचलों में लागू किया जा रहा है:
- समय-सीमा और बजट: साल 2030 तक चलने वाली इस मेगा परियोजना की कुल लागत 1,000 करोड़ रुपये तय की गई है।
- प्रथम चरण का दायरा: शुरुआती दौर में ही राज्य के 8 महत्वपूर्ण जिलों को चुना गया है। इनमें छह पहाड़ी जिले (अल्मोड़ा, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग) और दो मैदानी जिले (ऊधम सिंह नगर व हरिद्वार) शामिल हैं।
- जमीनी पहुंच: इन 8 जिलों के अंतर्गत आने वाले 15 विकासखंडों की 519 ग्राम पंचायतों के कुल 1017 गांवों में काम तेजी से शुरू कर दिया गया है।
- सीधा फायदा: इस पहले ही चरण में पहाड़ों में रहने वाले 76,000 से अधिक ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने और उनकी कृषि आय को सुरक्षित करने का लक्ष्य है।
- नोडल एजेंसी: इस पूरी व्यापक मुहिम को धरातल पर क्रियान्वित करने का जिम्मा जलागम प्रबंधन विभाग संभाल रहा है।

“जलवायु परिवर्तन आज हमारे पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई यह योजना हमारे मेहनतकश किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी, उनके जलस्रोतों को पुनर्जीवित करेगी और रिवर्स माइग्रेशन (पलायन रोकने) में मील का पत्थर साबित होगी।”- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)
Uttarakhand Barani Krishi Yojana- 6 मुख्य स्तंभों पर टिकी है पूरी परियोजना
जलागम प्रबंधन विभाग इस योजना के तहत गांवों में सीधे इन छह मोर्चों पर काम कर रहा है:
आधुनिक एवं पर्यावरण-मित्र तकनीक: खेतों में ऐसी कृषि प्रणालियों और नई तकनीकों को बढ़ावा देना जो कम पानी और बदलते मौसम में भी बंपर पैदावार दे सकें।
- जलस्रोतों का कायाकल्प: वैज्ञानिक पद्धतियों (स्प्रिंग-शेड मैनेजमेंट) का उपयोग करके पहाड़ी नदी-नालों और सूखते हुए पारंपरिक प्राकृतिक जलस्रोतों के जलप्रवाह को बढ़ाना।
- कार्बन फेंसिंग से अतिरिक्त कमाई: पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए कार्बन फेंसिंग प्रणालियों के जरिए किसानों के लिए कमाई के नए और वैकल्पिक रास्ते खोलना।
- उत्पादकता में रिकॉर्ड सुधार: आधुनिक बीजों और जैविक खादों के सही संतुलन से बारानी (सूखी) और सिंचित, दोनों ही प्रकार की फसलों की प्रति हेक्टेयर उपज को बढ़ाना।
- एग्री-क्लस्टर्स की स्थापना: किसानों को बिचौलियों से बचाने और उनकी उपज का अधिकतम एवं उचित मूल्य दिलाने के लिए विशेष कृषि क्लस्टरों का निर्माण करना।
- ग्रीन हाउस गैसों पर लगाम: पारंपरिक खेती और पराली जैसी समस्याओं को वैज्ञानिक ढंग से सुलझाकर कृषि क्षेत्र से होने वाले हानिकारक कार्बन उत्सर्जन में प्रभावी कमी लाना।
Uttarakhand Barani Krishi Yojana- जलागम प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण से मिलने वाले जमीनी फीडबैक और सफलता के बाद इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसे उत्तराखंड के बाकी बचे सभी 24 विकासखंडों में भी लागू किया जाएगा।
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