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Nanda Devi Monitoring Exp 2026- भोजपत्र और बुरांश की दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक पुनर्जन्म - Him Varta

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- भोजपत्र और बुरांश की दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक पुनर्जन्म

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमारे उच्च हिमालयी क्षेत्र, ग्लेशियर और दुर्लभ वन्यजीव किस हाल में हैं? इसी का सटीक सच पता लगाने के लिए देश के शीर्ष विज्ञानियों का एक दल नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के सबसे दुर्गम और प्रतिबंधित ‘कोर जोन’ में 21 दिनों की साहसिक खोज पूरी करके वापस लौट आया है। ‘चतुर्थ नंदा देवी जैव विविधता अनुश्रवण दशकीय अभियान 2026’ के तहत गए इस दल ने नंदा देवी पर्वत श्रृंखलाओं, बुग्यालों और घाटियों की खाक छानकर जैव विविधता में आ रहे बदलावों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली जानकारियां जुटाई हैं।

यह ऐतिहासिक अभियान इसलिए भी खास है क्योंकि यह हर 10 साल में केवल एक बार आयोजित किया जाता है। 7 जून 2026 को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से रवाना हुआ यह दल 21 दिनों तक शून्य से नीचे के तापमान में रहकर उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी के कई राज खोलकर लाया है।

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- देश के शीर्ष संस्थानों और जवानों की साझी ताकत

Bio Diversity Mission 2026- इस बेहद कठिन और वैज्ञानिक मिशन को अंजाम देने के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित शोध संस्थानों और सुरक्षा बलों ने हाथ मिलाया था। इस संयुक्त अभियान दल में मुख्य रूप से शामिल थे:

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून
  • गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान, कोसी (अल्मोड़ा)
  • हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर
  • उत्तराखंड वन विभाग के विज्ञानी और तकनीकी विशेषज्ञ
  • सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिए ITBP और SDRF के जांबाज जवान
Nanda Devi Monitoring Exp 2026

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

यह दल चमोली के सीमांत लाता गांव से पैदल रवाना हुआ था। इसके बाद लाताखर्क, धरासी, डिब्रूगेटा, डियोड़ी, भितरतोली, रामनी, मुजगढ़ और पातालखान जैसे बेहद खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए नंदा देवी के मुख्य बेस कैंप ‘सरसोपाताल’ तक पहुंचा।

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- इस दौरान विज्ञानियों ने केवल पारंपरिक तरीकों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि डेटा जुटाने के लिए आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिसमें शामिल हैं:

  • हाई-टेक ड्रोन और कैमरा ट्रैप्स
  • सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) और जीआइएस (GIS) तकनीक
  • ओएसएल (Optically Stimulated Luminescence) विधि

इन तकनीकों की मदद से उच्च हिमालयी क्षेत्रों की जैव विविधता, वृक्षरेखा (ट्री-लाइन) के बदलते पैटर्न, हिमनदों (ग्लेशियर्स) और मोरेन (हिमोढ़) का बेहद बारीकी से गहन अध्ययन किया गया।

Nanda Devi Monitoring Exp 2026

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- बुग्यालों पर संकट का अध्ययन

अध्ययन के दौरान विज्ञानियों के लिए एक अच्छी खबर यह रही कि उन्हें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भोजपत्र, फर, सैलिक्स, रोडोडेन्ड्रान (बुरांश की प्रजाति) और मैपल जैसी महत्वपूर्ण वनस्पतियों का प्राकृतिक पुनर्जन्म देखने को मिला। इसके साथ ही दल ने कई दुर्लभ और संकटग्रस्त जड़ी-बूटियों की प्रजातियों का उनके प्राकृतिक आवास में अध्ययन किया। विज्ञानियों ने वृक्षरेखा और हिमरेखा के बीच फैले बुग्यालों (घास के मैदानों) से मिट्टी और वनस्पतियों के ऐसे आंकड़े जुटाए हैं, जो यह बताएंगे कि जलवायु परिवर्तन हमारे पहाड़ों को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- हिम तेंदुए के मिले साक्ष्य

Nanda Devi Monitoring Exp 2026- वन्यजीवों के लिहाज से यह अभियान बेहद सफल रहा। 21 दिनों की ट्रैकिंग के दौरान विज्ञानियों को कई दुर्लभ वन्यजीव सीधे अपनी आंखों के सामने विचरते हुए दिखाई दिए, तो कुछ के पुख्ता प्रमाण मिले:

  • प्रत्यक्ष दिखाई दिए वन्यजीव: हिमालयी थार, भरल (नीली भेड़), अत्यंत दुर्लभ कस्तूरी मृग, हिमालयी काला/भूरा भालू, साइबेरियन वीजल और पाईका (छोटा स्तनधारी)।
  • अप्रत्यक्ष साक्ष्य (पगचिह्न/मल आदि): पूरी दुनिया में लुप्तप्राय माने जाने वाले हिम तेंदुआ (Snow Leopard), हिमालयी रेड फाक्स (लाल लोमड़ी), सिरो और हिमालयी मार्टिन।

इन दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखने और इनके पुख्ता विजुअल्स रिकॉर्ड करने के लिए विज्ञानियों ने इस पूरे रूट और नंदा देवी बेस कैंप के आसपास 50 से अधिक अत्याधुनिक कैमरा ट्रैप स्थापित किए हैं, जिनका डेटा आने वाले दिनों में हिमालयी वन्यजीव संरक्षण की नई रूपरेखा तय करेगा।

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