Dunagiri Apple Farming- बर्फबारी से बदली तस्वीर, सेब बागानों को मिला नया जीवन

Dunagiri Apple Farming- सूखे की मार झेलने के बाद अब दूनागिरि क्षेत्र में गिरी बर्फ से सेब बागानों के लिए संजीवनी साबित हुई है, अनुकूल मौसम से उत्साहित उद्यान विभाग ने 256 एकड़ में फैले दूनागिरि राजकीय उद्यान में सेब के रकबे को और विस्तार देने की तैयारी शुरू कर दी है, इस क्रम में चार एकड़ क्षेत्र में हर्षिल क्षेत्र की उन्नत सेब प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।

दूनागिरि की नर्सरी में क्लोनल रूट स्टॉक पद्धति से तैयार सेब की उन्नत किस्मों के करीब दो हजार पौधों को क्वारंटाइन में रखा गया है, ताकि किसी भी प्रकार के रोग या संक्रमण की आशंका न रहे। गढ़वाल मंडल के साथ-साथ अन्य हिमालयी राज्यों में इन प्रजातियों के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इन्हें कुमाऊं क्षेत्र में भी आजमाया जा रहा है।

Dunagiri Apple Farming- 256 एकड़ में फैले दूनागिरि राजकीय उद्यान में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में पॉलीहाउस, पौधालय और प्रसिद्ध दूनागिरि मूली के बीज उत्पादन का कार्य किया जाता है। शेष क्षेत्र में सेब का बागान विकसित किया गया है। वर्तमान में लगभग 75 एकड़ में सेब के बाग फैले हुए हैं।

बागान में क्लोनल रूट स्टॉक से तैयार सेब की गेलगाला, सुपरचीफ, जेरेमाइन, एडमस्पर, ग्रिम स्मिथ सहित अन्य उन्नत प्रजातियों के करीब आठ हजार पेड़ लगाए गए हैं। इनमें से 500 पेड़ों से इस वर्ष फल उत्पादन शुरू हो गया है, जबकि शेष पेड़ों से आगामी सीजन में उत्पादन लिया जाएगा। वहीं इस सीजन में हर्षिल से लाए गए दो हजार नए पौधों के रोपण के लिए भूमि पूरी तरह तैयार कर ली गई है।

क्लोनल रूट स्टॉक से विकसित ये पौधे रोपण के पहले ही वर्ष फल देना शुरू कर देते हैं, हालांकि पौधों की बेहतर बढ़वार सुनिश्चित करने के लिए अधिकांश फल प्रारंभिक अवस्था में ही गिरा दिए जाएंगे। गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रत्येक पेड़ पर तीन से चार फल ही रखे जाएंगे। पूर्ण व्यावसायिक उत्पादन तीन वर्ष बाद लिया जाएगा।

Dunagiri Apple Farming

Dunagiri Apple Farming- दूनागिरि की ऊंचाई और जलवायु को ध्यान में रखते हुए यहां सिनिकोगाला प्रजाति को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इस प्रजाति के 1200 पौधे लगाए जा रहे हैं, जबकि शेष 800 पौधे किंगराट, जेरेमाइन, एडम और स्कारलेट-टू किस्मों के होंगे।

बीज के बजाय टिश्यू कल्चर तकनीक के माध्यम से मातृ पौधों से क्लोन तैयार किए जाते हैं। सर्दियों में पौधों को जमीन के पास से काटा जाता है, जिससे नए अंकुर विकसित होते हैं। इन टहनियों को मिट्टी में दबाने पर उनमें जड़ें विकसित हो जाती हैं। सर्दियों के दौरान इन रूट स्टॉक को मातृ पौधे से अलग कर नर्सरी में लगाया जाता है, जहां उन्नत सेब किस्मों की कलम जोड़कर पौधे तैयार किए जाते हैं।

Dunagiri Apple Farming- दूनागिरि राजकीय उद्यान के ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक इंद्र लाल ने बताया कि हर्षिल क्षेत्र की सेब प्रजातियां दूनागिरि की जलवायु के अनुकूल हैं। विशेष रूप से सिनिकोगाला के लिए यहां की मिट्टी, हवा और पानी बेहद उपयुक्त हैं। विदेशी मूल की ये उन्नत किस्में अब हर्षिल के पौधालय में ही क्लोनल रूट स्टॉक तकनीक से विकसित की जा रही हैं, जिसमें एमएम-111 और एमएम-106 जैसे उन्नत रूट स्टॉक का उपयोग किया जा रहा है। नए रोपण के बाद बागान में सेब के पेड़ों की संख्या 10 हजार तक पहुंच जाएगी। विभाग का लक्ष्य दूनागिरि एप्पल गार्डन को एक मॉडल बागान के रूप में विकसित करना है।

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