Plastic Salad- सलाद हमें ताकत देता है. इसी वजह से ज्यादातर घरों में लोग इसे भोजन के साथ या अलग से खाना पसंद करते हैं. बहुत सारे घरों में हरी पत्तियों वाले रोमैन लेट्यूस को सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. क्योंकि इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. रोमैन लेट्यूस विटामिन सी, विटामिन के और फोलेट से भरपूर होता है. यह बीटा कैरोटीन का अच्छा स्रोत है, जो शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर इसे लेकर हंगामा मचा हुआ है. लोग टिक टॉक पर इन हरी पत्तियों को छीलते हुए वीडियो डाल रहे हैं, और पूछ रहे कि क्या सच में यह प्लास्टिक है?
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग इन हरी पत्तियों को जलाकर भी दिखा रहे और दावा कर रहे कि यह बिल्कुल प्लास्टिक की तरह जल रहा है. सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा तो एक्सपर्ट्स को भी जवाब देना पड़ा . यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च के हवाले से कहा, यह अन्य हरी पत्तियों की तरह नहीं होता जो तुरंत टूट जाए. इसके बावजूद यह पूरी तरह प्राकृतिक है और खाने योग्य है. लेट्यूस पर एपिडर्मिस की एक परत होती है, जो छीनी जा सकती है और ठंड की वजह से वह पूरा नहीं होता. इसे ही देखकर लोग भ्रमित हो रहे हैं.

एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर लेट्यूस को फ्रिज में ज्यादा देर तक रखा जाए तो यह परत और भी मोटी हो सकती है, जो देखने में बिल्कुल प्लास्टिक की तरह नजर आती है. लेकिन सच में यह प्लास्टिक नहीं है बल्कि एपिडर्मल कोटिंग है. 2018 में भी एक महिला ने यह मुद्दा उठाया था, उसके बाद वैज्ञानिकों ने रिसर्च की थी. तब हकीकत सामने आई थी. दरअसल, लोग इसलिए परेशान हो रहे हैं क्योंकि बीते दिनों कई तरह के बैक्टीरिया की वजह से लोगों की मौतें हुई हैं. इसलिए जब भी ऐसी कोई चीज दिख जाती है, तो वे डर जाते हैं. अगस्त 2022 में ई. कोली के प्रकोप ने लेट्यूस को प्रभावित किया. यहां तक इसकी वजह से 42 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
पूर्वी फिनलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कुछ साल पहले एक रिसर्च की थी. तब उन्होंने पाया था कि लेट्यूस के पौधे अगर 14 दिनों के लिए प्लास्टिक से दूषित मिट्टी में रखे जाएं तो वे नैनो प्लास्टिक के संपर्क में आ जाते हैं. इस लेट्यूस को जब कीड़ों को खिलाया गया तो उनमें ब्लैक सोल्जर फ्लाई लार्वा पाए गए थे. पता चला कि नैनो प्लास्टिक पौधों की जड़ों द्वारा उठाए गया था जो कि पत्तियों में जमा हो गया था. इस रिसर्च पर भी खूब हंगामा हुआ था और लोगों का कहना था कि अगर नैनो प्लास्टिक के संपर्क में वे आ जाते हैं तो फिर प्लास्टिक तो इसके माध्यम से शरीर में पहुंच ही जाएगा.