Haldwani Shuddhikaran Case- हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ से जुड़े बहुचर्चित विवाद पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल हाईकोर्ट) में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार के आश्वासन के बाद याचिका को निस्तारित कर दिया है।
- सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता ने पीठ को आश्वस्त किया कि पुलिस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा रहा है।
- दो एफआईआर दर्ज: राज्य सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि मामले में अब तक 2 FIR दर्ज हो चुकी हैं, एक हल्द्वानी में और दूसरी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर बेंगलुरु में दर्ज जीरो एफआईआर।
- केस ट्रांसफर प्रक्रिया: बेंगलुरु में दर्ज जीरो एफआईआर को आगे की विधिक जांच के लिए हल्द्वानी पुलिस को ट्रांसफर किया जा रहा है।
- साक्ष्यों की सुरक्षा: सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा गया है।
- जनहित याचिका पर फैसला: राज्य सरकार और महाधिवक्ता के रुख को देखते हुए हाईकोर्ट ने देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ द्वारा दायर पीआईएल (PIL) को निस्तारित कर दिया।

Haldwani Shuddhikaran Case- क्या था पूरा मामला?
- 8 अगस्त 2026: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बड़ी जनसभा आयोजित हुई थी।
- 11 अगस्त 2026: एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा मैदान में गंगाजल छिड़ककर और वैदिक मंत्रोच्चार व हवन के साथ कथित रूप से शुद्धिकरण किया गया।
- संसद से प्रेस कॉन्फ्रेंस तक हंगामा: मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना की कड़ी निंदा की।
- पलटवार और मुकदमों की बौछार: राहुल गांधी की पीसी के बाद शुद्धिकरण से जुड़े दो युवाओं ने हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया।
- बेंगलुरु में जीरो एफआईआर: 4 सितंबर को आदिवासी कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा की शिकायत पर बेंगलुरु में बीजेपी नेताओं के खिलाफ नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में जीरो एफआईआर दर्ज की गई।
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