Builder Fraud Uttarakhand- उत्तराखंड में फ्लैट खरीदारों को ठगकर करोड़ों रुपये लेकर गायब होने वाले बिल्डरों के खिलाफ अब बड़ा एक्शन होने जा रहा है, लंबे समय से अधूरी परियोजनाओं, कब्जा न मिलने, फर्जी वादों और वित्तीय घोटालों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) सख्त नियमों की तैयारी कर रही है, प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद अब बिल्डरों के लिए केवल आकर्षक विज्ञापन और चमकदार ब्रोशर के सहारे लोगों से पैसा जुटाना आसान नहीं रहेगा।
सूत्रों के अनुसार रेरा प्रदेश की सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए अनिवार्य बीमा व्यवस्था लागू करने पर काम कर रहा है, इसके तहत यदि कोई बिल्डर परियोजना अधूरी छोड़कर फरार हो जाता है, दिवालिया हो जाता है या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो खरीदारों की जमा पूंजी सुरक्षित रहेगी, इस मॉडल को अंतिम रूप देने के लिए बीमा कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ लगातार चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि अगली बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जा सकता है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां फ्लैट खरीदारों को उनकी रकम की सुरक्षा की कानूनी गारंटी मिलेगी। रेरा का मानना है कि घर खरीदना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि आम आदमी की जीवनभर की कमाई का फैसला होता है, इसलिए खरीदारों को पूरी तरह बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
Builder Fraud Uttarakhand- पिछले कुछ वर्षों में देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी समेत कई शहरों में बिल्डरों के खिलाफ शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई मामलों में लोगों को वर्षों बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। कहीं क्लब हाउस और पार्किंग जैसी सुविधाएं कागजों तक सीमित रहीं तो कहीं परियोजना का पैसा दूसरी साइटों में लगा दिया गया, कुछ मामलों में बिल्डर कार्यालय बंद कर फरार हो गए, जबकि खरीदार ईएमआई और किराया दोनों भरते रहे।
रेरा अब खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए “रिजर्व सेफ्टी फंड” बनाने की भी तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक खरीदारों से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा अलग खाते में जमा रहेगा, जिसे परियोजना पूरी होने के पांच साल बाद तक प्रमोटर नहीं निकाल सकेगा। यदि निर्माण में खामियां सामने आती हैं, रिफंड देना पड़ता है या देरी के कारण ब्याज भुगतान की नौबत आती है, तो इसी फंड का उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञ इसे रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा सुधार मान रहे हैं।
इसके साथ ही एस्क्रो अकाउंट व्यवस्था को भी और कड़ा किया जाएगा। मौजूदा नियमों के अनुसार खरीदारों से मिलने वाली 70 प्रतिशत राशि अलग खाते में रखी जानी चाहिए, ताकि पैसा उसी परियोजना में खर्च हो। लेकिन जांच में सामने आया कि कई बिल्डरों ने इस रकम का इस्तेमाल दूसरी जमीन खरीदने, नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने और निजी खर्चों में किया।

नई व्यवस्था के तहत खरीदारों की रकम सीधे नियंत्रित एस्क्रो खाते में जमा होगी। निर्माण प्रगति के आधार पर ही पैसा निकाला जा सकेगा और प्रत्येक निकासी पर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और रेरा की संयुक्त निगरानी रहेगी। पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिसे खरीदार भी ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
Builder Fraud Uttarakhand- रेरा ने परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाने, पंजीकरण संशोधन और पुराने पंजीकरण रद्द कर नए पंजीकरण देने की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है। अब ऐसे मामलों में पहले सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी और खरीदारों व अन्य हितधारकों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
रेरा अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद नरेश सी. मठपाल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में रियल एस्टेट सेक्टर में कई और सख्त फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में अवैध रियल एस्टेट कारोबार पर निगरानी बढ़ाने की बात कही है।
सूत्रों के अनुसार रेरा अब उन तकनीकी एजेंसियों और संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर सकता है, जिनकी मंजूरी के बाद विवादित जमीनों और अधूरी सुविधाओं वाली परियोजनाएं शुरू हुईं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बिल्डर-फाइनेंसर नेटवर्क और परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया पर भी कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
Builder Fraud Uttarakhand- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी तरीके से लागू होता है तो उत्तराखंड का रियल एस्टेट सेक्टर पूरी तरह बदल सकता है। अब तक खरीदार केवल भरोसे और विज्ञापनों के आधार पर निवेश करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के बाद बिल्डरों को सपनों के साथ सुरक्षा की गारंटी भी देनी होगी।