Haridwar Kumbh- हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले को लेकर श्री गंगा सभा ने मेला क्षेत्र को हिंदू धार्मिक क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है। प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में सभा अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि अंग्रेजों के समय में भी हरिद्वार नगर पालिका में गैर-हिंदुओं के ठहरने और व्यवसाय करने पर रोक थी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आने वाले कुंभ से पहले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर नियंत्रण लगाया जाए।
गौतम ने कहा कि यह कदम भव्य और सुरक्षित कुंभ सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ को लेकर उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण जो श्रद्धालु स्नान नहीं कर पाए थे, उन्हें अब अवसर मिलेगा। इससे सनातन धर्म को बल मिलेगा और स्थानीय व्यापार में भी वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार नगर पालिका क्षेत्र पहले से ही गैर-हिंदू और मद्य, मांस निषेध क्षेत्र घोषित है, जिसे सरकार को लागू कराना चाहिए।
Haridwar Kumbh- संत समाज में मतभेद
Haridwar Kumbh- हालांकि, इस मांग पर संत समाज में मतभेद देखने को मिले। कुछ संतों ने इसे जायज ठहराया, जबकि कुछ ने इसे मेला क्षेत्र और आयोजनों की व्यावहारिकता को देखते हुए अव्यावहारिक बताया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि मेला क्षेत्र को पूरी तरह गैर-हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित करना कठिन है। वहीं, कुछ संतों ने वेटिकन सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वहां गैर-ईसाई नहीं रह सकते, तो हरिद्वार जैसे धार्मिक केंद्र में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयनंद ने कहा कि सनातन धर्म “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना रखता है, लेकिन जब धर्म की पवित्रता को साजिश के तहत प्रभावित किया जाता है, तो इस तरह की मांग स्वाभाविक और जायज लगती है।
Haridwar Kumbh- इस तरह, कुंभ मेला क्षेत्र को लेकर संतों और प्रशासन के बीच चर्चा जारी है, और सरकार की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।