Indian Defence Export- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की मुहिम और वैश्विक स्तर पर मेक इन इंडिया हथियारों की बढ़ती मांग ने भारतीय रक्षा उद्योग को नए आयाम दिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये (लगभग 3.6 अरब यूरो) तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66% अधिक है।
हाल ही में जारी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों में तोप के गोले, मोर्टार, प्रोपेलेंट्स और विस्फोटकों की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते भारत पिछले चार वर्षों में 1600% से अधिक के निर्यात उछाल के साथ यूरोप में युद्ध सामग्रियों की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। साल 2020-21 में इस मामले में भारत 18वें स्थान पर था।
Indian Defence Export- यूरोपीय बाजार में भारत की स्थिति
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पोलैंड, चेक गणराज्य, रोमानिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया जैसे पूर्वी और मध्य यूरोपीय देशों में हथियारों की मांग काफी बढ़ी है। यूरोप की अपनी फैक्ट्रियां इस मांग को पूरा करने में असमर्थ रही हैं, जिसके कारण दक्षिण कोरिया, स्पेन और भारत जैसे देश इस आपूर्ति को पूरा कर रहे हैं।
- सैन्य सामग्री सप्लायर: दक्षिण कोरिया (8,324 करोड़ रुपये) और स्पेन (3,320 करोड़ रुपये) के बाद भारत 3,000 करोड़ रुपये के सैन्य उत्पादों के निर्यात के साथ यूरोप में तीसरे स्थान पर है।
- विस्फोटक निर्यात में नंबर 1: वर्ष 2025-26 में भारत 427 करोड़ रुपये के विस्फोटक निर्यात के साथ यूरोप में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है, जिसने अमेरिका (332 करोड़ रुपये) को पीछे छोड़ दिया।
- प्रोपेलेंट पाउडर्स में दूसरा स्थान: प्रोपेलेंट पाउडर्स (गोले, रॉकेट और मिसाइल धकेलने वाले पाउडर) के निर्यात में भारत 883 करोड़ रुपये के साथ मिस्र (911 करोड़ रुपये) के बाद दूसरे स्थान पर है।
- भारत से निर्यात की जाने वाली कुल सैन्य सामग्री का लगभग 75% हिस्सा यूक्रेन से सटे 13 यूरोपीय देशों में भेजा गया है। वर्तमान में भारत का रक्षा निर्यात दुनिया के 80 से अधिक देशों में फैल चुका है।

Indian Defence Export- घरेलू उत्पादन और औद्योगिक तंत्र
Indian Defence Export- प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 1.78 लाख करोड़ रुपये की सैन्य सामग्रियां तैयार की गईं, जो पिछले वर्ष (1.54 लाख करोड़) से 15.6% अधिक है।
- निर्यात में सहभागिता: सरकारी रक्षा कंपनियों ने 21,071 करोड़ रुपये और निजी कंपनियों ने 17,353 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पाद तैयार किए।
- औद्योगिक आधार: देश में 16 बड़ी सरकारी कंपनियां, करीब 840 बड़ी और मध्यम आकार की निजी कंपनियां तथा 17,000 से अधिक एमएसएमई (MSME) और रक्षा स्टार्टअप कलपुर्जे उपलब्ध करा रहे हैं।
- भविष्य का लक्ष्य: सरकार ने वर्ष 2029 तक वार्षिक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

Indian Defence Export- ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग 2026 के अनुसार:
- सेना की ताकत: भारतीय सेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना (अमेरिका, रूस और चीन के बाद) है।
- सक्रिय सैन्य बल: 14 लाख 31 हजार सक्रिय कर्मियों के साथ भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है।
- टैंक क्षमता: 3,913 टैंकों के साथ भारत वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान पर है।
- वायुसेना: 2,183 मिलिट्री एयरक्राफ्ट्स के साथ भारतीय वायुसेना दुनिया में चौथे स्थान पर है।
- नौसेना: ‘वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री वॉरशिप्स’ 2026 के मुताबिक भारतीय नौसेना दुनिया में 7वें स्थान पर है।
रक्षा क्षेत्र में भारत की इस अभूतपूर्व प्रगति ने देश को न केवल रक्षा आयात पर निर्भरता से मुक्त किया है, बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।
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