Dharmik Syllabus Uttarakhand- उत्तराखंड ने एक बार फिर शिक्षा और नीतिगत सुधारों के क्षेत्र में देश के सामने नई मिसाल पेश की है। राज्य में अल्पसंख्यक समाज के विद्यार्थियों के लिए एक अनोखा और अनूठा धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर बच्चों को देश की समृद्ध विरासत, संस्कृति और देशभक्ति से जोड़ना है।
शिक्षा विभाग से अंतिम मंजूरी मिलते ही उत्तराखंड ऐसा मॉडल लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
Dharmik Syllabus Uttarakhand- धर्म के साथ राष्ट्रवाद का संगम
इस नए धार्मिक सिलेबस में पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अलावा कई महत्वपूर्ण विषयों को अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है:
- राष्ट्रवाद और भारतीय इतिहास: विद्यार्थियों को भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटनाओं से रूबरू कराया जाएगा।
- स्वतंत्रता सेनानी और महापुरुष: देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों की जीवनी और विचारों को शामिल किया गया है।
- सांस्कृतिक पहचान: भारत की विविधता में एकता और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी जाएगी ताकि बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल हो सके।
Dharmik Syllabus Uttarakhand- कक्षा 1 से 12 तक का खाका तैयार
Dharmik Syllabus Uttarakhand- प्राधिकरण द्वारा चरणबद्ध तरीके से सिलेबस का ढांचा तैयार किया गया है:
- प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर: कक्षा 1 से 8 तक का धार्मिक पाठ्यक्रम पहले ही तैयार किया जा चुका है।
- माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर: अब कक्षा 9 से 12 तक के लिए भी विस्तृत प्रारूप (Draft) तैयार कर लिया गया है। इसे जल्द ही शिक्षा विभाग की औपचारिक स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है।

Dharmik Syllabus Uttarakhand परीक्षा और प्रमाण पत्र की विशेष व्यवस्था
धार्मिक शिक्षा के इस ढांचे को व्यवस्थित रूप देने के लिए मूल्यांकन और प्रमाणन की व्यवस्था लागू की जा रही है:
- प्राधिकरण कराएगा परीक्षा: उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
- मिलेगा प्रमाण पत्र: परीक्षा में सफल होने वाले छात्र-छात्राओं को प्राधिकृत प्रमाण पत्र (Certificates) प्रदान किए जाएंगे। हालांकि, इन प्रमाण पत्रों की अन्य शैक्षणिक संस्थानों में मान्यता और शर्तों से जुड़ी गाइडलाइंस विभागीय मंजूरी के बाद स्पष्ट होंगी।
Dharmik Syllabus Uttarakhand अनिवार्य नहीं होगा विषय
- विद्यार्थियों की स्वेच्छा: यह पाठ्यक्रम किसी भी छात्र पर थोपा नहीं जाएगा। विद्यार्थी अपनी इच्छा और रुचि के अनुसार ही इसका चयन कर सकेंगे।
- समय सारिणी: नियमित कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विद्यालयों में मुख्य विषयों की पढ़ाई से पहले या उसके बाद इस सिलेबस को पढ़ाने का प्रस्ताव है।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा:
फिलहाल प्राधिकरण को शिक्षा विभाग से इस प्रारूप की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। जैसे ही शासन और शिक्षा विभाग से हरी झंडी मिलती है, उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां अल्पसंख्यक बच्चों के लिए धार्मिक शिक्षा के साथ राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति को जोड़कर इस प्रकार का एकीकृत पाठ्यक्रम लागू किया गया है।
यह भी पढ़ें…
