Maa Kalratri Puja Vidhi
Maa Kalratri Puja Vidhi- शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन अत्यंत रहस्यमयी, अलौकिक और विशेष सिद्धि प्राप्ति का माना जाता है। इस पावन तिथि पर माँ दुर्गा के अत्यंत उग्र, भयंकर किंतु कल्याणकारी स्वरूप माँ कालरात्रि की पूरी निष्ठा और विधि-विधान के साथ उपासना की जा रही है। माँ कालरात्रि दुष्टों, नकारात्मक शक्तियों और असुरों का नाश करने वाली तथा अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट और भय से मुक्ति दिलाने वाली ‘शुभंकरी’ देवी हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तमी तिथि की रात्रि का तांत्रिक, आध्यात्मिक और विशेष साधना के क्षेत्र में अत्यधिक महत्व होता है। आज के दिन तंत्र-मंत्र और साधना के क्षेत्र में लगे साधकों ने रात्रि के समय विशेष अनुष्ठान संपन्न किए। वहीं, सामान्य भक्तों ने भी माँ कालरात्रि का स्मरण कर अपने जीवन के सभी शत्रुओं, अड़चनों, मानसिक तनाव और अज्ञात भय से मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना की। माँ के इस स्वरूप के स्मरण मात्र से ही नकारात्मक ऊर्जा कोसों दूर भाग जाती है।
Maa Kalratri Puja Vidhi- माँ कालरात्रि की पूजन विधि
Maa Kalratri Puja Vidhi- सप्तमी तिथि पर माता को प्रसन्न करने के लिए विशेष नियमों और सामग्रियों का ध्यान रखा जाता है:

- शुभ रंग और वस्त्र: आज के दिन नीले या काले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर माता की पूजा करना बेहद फलदायी और शुभ माना जाता है।
- पूजन सामग्री: माँ कालरात्रि को सुगंधित ‘रातरानी’ के फूल अत्यंत प्रिय हैं। पूजन के दौरान धूप, गुग्गल और शुद्ध घी का दीप जलाकर माता का आह्वान किया जाता है।
- विशेष भोग: माता को गुड़ का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुड़ का भोग अर्पित करने से माँ कालरात्रि अपने भक्तों के सभी कष्टों और दुखों को हर लेती हैं।
Maa Kalratri Puja Vidhi- भय और संकट मुक्ति के लिए विशेष मंत्र
Maa Kalratri Puja Vidhi- पूजन अनुष्ठान के दौरान माता के समक्ष धूप-गुग्गल जलाकर उनके इस अत्यंत शक्तिशाली और पावन मंत्र का पूर्ण श्रद्धा के साथ उच्चारण किया जाता है:
एकवेणी जपाकर्णकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता,
लामोष्ठच्छः कृताधिपः कर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा,
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
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