Kalp Kedar Mandir Uttarkashi
Kalp Kedar Mandir Uttarkashi- उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध धराली गांव में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक संकल्प दृश्यमान हुआ है। पिछले साल अगस्त में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण मलबे और गाद में समाए अति प्राचीन कल्प केदार मंदिर को दोबारा ढूंढने और उसके जीर्णोद्धार के लिए ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास शुरू कर दिए हैं।
नवरात्रि के पावन पर्व के प्रथम दिन धराली गांव में उत्सव और भक्ति का माहौल रहा। गांव के आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में निर्धारित स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना और विशेष हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया। इसके उपरांत समेश्वर देवता द्वारा दिए गए समय और निर्देशानुसार ग्रामीणों ने अपने निजी संसाधनों से मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ किया।
Kalp Kedar Mandir Uttarkashi- 1803 से लेकर अब तक

Kalp Kedar Mandir Uttarkashi- कल्प केदार मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों के अनुसार, इस केदारपीठ का इतिहास कई भीषण प्राकृतिक आपदाओं और पुनरुद्धार की कहानियों से भरा हुआ है:
- वर्ष 1803 की आपदा: मान्यता है कि 1803 में आई भयंकर बाढ़ में यहाँ स्थित करीब 204 मंदिरों का समूह बह गया था।
- वर्ष 1887 की स्थिति: आपदा के कई वर्षों बाद 1887 में यहाँ मात्र तीन मंदिर दृश्यमान हुए थे।
- वर्ष 1926 की खुदाई: 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा ज़मीन में धंस गया था और अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। तब ग्रामीणों ने कड़ी मेहनत और खुदाई करके मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था।
- 2026 की मुहिम: 1926 के ठीक सौ साल बाद पिछले वर्ष अगस्त में आई प्रलयकारी आपदा ने एक बार फिर मंदिर को लगभग 25 फीट नीचे मलबे में दफन कर दिया। अब इतिहास दोहराते हुए चौथी बार मंदिर को खोजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
Kalp Kedar Mandir Uttarkashi- मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

Kalp Kedar Mandir Uttarkashi- मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि समेश्वर देवता के आदेश पर फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर मलबा हटाने का काम कर रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से भी कल्प केदार मंदिर के पुनर्निर्माण व जीर्णोद्धार की घोषणा की जा चुकी है। जल्द ही मंदिर समिति का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से भेंट कर मंदिर की खोज, वैज्ञानिक उत्खनन और भविष्य के नवनिर्माण की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा करेगा।
आपदा के बाद धराली गांव में जनजीवन को सामान्य बनाने और पुनर्वास की चुनौतियों के बीच ग्रामीणों द्वारा कल्प केदार मंदिर को पुनर्जीवित करने की यह पहल केवल एक धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की एक अद्भुत मिसाल है। संपूर्ण क्षेत्रवासियों की निगाहें अब खुदाई में मंदिर के अवशेष मिलने और उसके भव्य जीर्णोद्धार पर टिकी हुई हैं।
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