Madrasa Recognition Uttarakhand- उत्तराखंड में मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता और उनके वैधानिक दर्जे को लेकर एक नया विवाद खड़ा होता दिख रहा है। राज्य सरकार की ओर से करीब आठ महीने पहले राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य इन शिक्षण संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेशभर में अब तक केवल दो संस्थानों ने ही इस प्राधिकरण से मान्यता हासिल की है।
कम संख्या में मान्यता लेने से इन संस्थानों की पात्रता और अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की वैधता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा और उससे जुड़ी छूट तभी मिल सकती है जब वह निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन करता हो। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन शिक्षण संस्थानों में 85 प्रतिशत छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित नहीं हैं, उनके अल्पसंख्यक दर्जे की वैधता की जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है। सवाल यह है कि जब बड़ी संख्या में संस्थान तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो आखिर वे किस आधार पर अल्पसंख्यक संस्थानों के नाम पर छूट का लाभ उठा रहे हैं।
Madrasa Recognition Uttarakhand- प्रदेश में संस्थानों की मौजूदा स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 452 मदरसे और 91 अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन 91 अन्य संस्थानों में से 27 माध्यमिक स्तर के और 64 बेसिक स्तर के संस्थान शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 35 मदरसों और मात्र दो अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों ने ही राज्य प्राधिकरण से मान्यता ली है।

Madrasa Recognition Uttarakhand- क्या हैं नए मान्यता नियम?
Madrasa Recognition Uttarakhand- उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी नियमावली के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि:
- मान्यता के नवीनीकरण के लिए संस्थानों को पिछले तीन साल के प्रवेश रजिस्टर की कॉपी देनी होगी।
- संस्थानों को एक स्वघोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा कि पिछले तीन वर्षों में उनके यहां गैर-अल्पसंख्यक समुदाय के 15 प्रतिशत से अधिक छात्र नामांकित नहीं रहे हैं।
- सभी शिक्षण संस्थानों को हर तीन साल में अपनी मान्यता का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।
Madrasa Recognition Uttarakhand- राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत संस्थान में 85 प्रतिशत छात्र अल्पसंख्यक समुदाय के होने चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया है कि वे सभी मानकों को पूरा करते हुए शीघ्र अपनी मान्यता सुनिश्चित करें।
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