Maa Kushmanda Puja Vidhi
Maa Kushmanda Puja Vidhi- शारदीय नवरात्रि के चतुर्थ दिवस पर अपनी मंद और दिव्य मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना करने वाली माँ कूष्मांडा की पूरी निष्ठा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ आराधना की जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि में चारों तरफ घना अंधकार था और दूर-दूर तक कोई अस्तित्व नहीं था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी ईश्वरीय मुस्कान और हास्य से ब्रह्मांड में ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का संचार किया था। माँ का यह स्वरूप आरोग्य, यश, बल और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना जाता है।
आज सुबह से ही देश भर के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में माँ कूष्मांडा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। ऐसी अटूट मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से माँ कूष्मांडा का स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट, रोग और शोक हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
Maa Kushmanda Puja Vidhi- माँ कूष्मांडा की पूजन विधि
Maa Kushmanda Puja Vidhi- चतुर्थ तिथि के दिन माता को प्रसन्न करने के लिए विशेष विधान का पालन किया जाता है:

- शुभ रंग और वस्त्र: आज के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, क्योंकि हरा रंग प्रकृति, हरियाली और ऊर्जा का प्रतीक है।
- पूजन सामग्री: माँ की प्रतिमा या चित्र के समक्ष धूप, दीप, गंध और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। माता को कुम्हड़ा (पेठा) या ताजे फल-फूल अर्पित करना बहुत श्रेष्ठ माना गया है।
- विशेष भोग: माँ कूष्मांडा को भोग के रूप में मालपुए का विशेष रूप से प्रसाद चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि मालपुए का भोग लगाने से माता अति प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।
Maa Kushmanda Puja Vidhi- यश प्राप्ति के लिए विशेष मंत्र
पूजन के दौरान माता के चरणों में ध्यान लगाते हुए धूप-दीप जलाकर उनके इस पावन और सिद्ध मंत्र का पूरी श्रद्धा के साथ जाप किया जाता है:
सुरासम्पूरकलधिरुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥
यह भी पढ़ें…
