Nanda Devi Lokajat- उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और अगाध आस्था का प्रतीक मां नंदादेवी लोकजात व बड़ीजात यात्रा अपने एक बेहद भावनात्मक और महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। यात्रा के अंतिम आबादी वाले गांव वाण में मां नंदा का भव्य और पारंपरिक स्वागत किया गया, जहां देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।
वाण गांव में पहुंचते ही मां नंदा की देवडोलियों का भव्य मिलन उनकी कुल परंपरा के अनुसार मां नंदा के भाई लाटू देवता से कराया गया। इस अलौकिक मिलन के साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे। हालांकि, इस आनंद और उल्लास के माहौल के साथ-साथ एक बेहद भावुक पल तब आया जब विधि-विधान और पूजा-पाठ के बाद मां नंदा को उनके कैलास के लिए विदा किया गया।

मां की विदाई के समय भक्तों की आंखें नम हो गईं। कई भावुक श्रद्धालु मां नंदा की डोली से लिपटकर फफक-फफक कर रोते नजर आए, जो माता के प्रति उनकी अटूट और सच्ची भावनाओं को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक यात्रा में लोकगायिका और साक्षात नंदा देवी का रूप मानी जाने वाली पद्म श्री बसंती बिष्ट भी अपने मामा के गांव कोट वाण पहुंचीं।
इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मां नंदा के प्रति लोगों में जो अटूट आस्था है, वह इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में विभिन्न स्थानों से आने वाले भक्त अपने साथ पारंपरिक कटार और छंतौली लेकर आते हैं, जिन्हें मां नंदा का सीधा प्रतीक माना जाता है।

Nanda Devi Lokajat- प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा प्रबंध
Nanda Devi Lokajat- वाण गांव और इसके आगे के दुर्गम रास्तों पर उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। जिलाधिकारी गौरव कुमार का कहना है कि प्रशासन के कड़े और समयबद्ध इंतजामों के कारण सभी देवडोलियां शांतिपूर्ण वातावरण में वाण गांव पहुंची हैं। अब यह लोकजात यात्रा आगे बेदनी बुग्याल की ओर प्रस्थान करेगी। पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि चूंकि अब देवडोलियां निर्जन और कठिन पड़ावों के लिए रवाना हो चुकी हैं, ऐसे में पुलिस प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसे देखते हुए पुलिस और SDRF की टीमों को अस्थाई व्यवस्था और सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

Nanda Devi Lokajat- जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर थराली के विधायक भूपाल राम टम्टा ने भी इस यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सरकार की सेवा और सुशासन नीति के तहत उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल भंडारे का आयोजन किया। विधायक का कहना था कि इस आस्था के महाकुंभ में भाग ले रहे सभी नंदा भक्तों का एकमात्र उद्देश्य मां नंदा की सेवा करना है, और राज्य सरकार हर पड़ाव पर यात्रियों के लिए पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रही है।
Nanda Devi Lokajat- 12 साल का इंतजार और अनुभव
इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। पौड़ी गढ़वाल से सपरिवार इस यात्रा में पहुंचे पंकज जुगराण ने साझा किया कि वे इस अलौकिक पल का पिछले 12 साल से इंतजार कर रहे थे और यहां आकर उन्हें जो आत्मिक आनंद मिल रहा है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वहीं, चमोली के जिला पंचायत सदस्य जयप्रकाश पंवार ने बताया कि साल 2014 की ऐतिहासिक राजजात यात्रा में भी वे बेदनी बुग्याल तक गए थे, और तब से मां नंदा के प्रति उनका विश्वास और अधिक दृढ़ हो गया है।
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