Uttarakhand UPNL Employees
Uttarakhand UPNL Employees- उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के लिए जारी किए गए नए अनुबंध ने राज्य में लगभग 25,000 कर्मचारियों के बीच फिर से तनाव पैदा कर दिया है, लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मचारियों ने इस अनुबंध को न्यायालय के आदेशों और श्रम कानूनों के खिलाफ बताया है।
राज्य सरकार ने पिछले महीने कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों को समान कार्य के बदले समान वेतन देने का निर्णय लिया था, जिसे कर्मचारियों ने खुशी-खुशी स्वीकार किया लेकिन अनुबंध में शामिल शर्तों ने इस खुशी को जल्द ही खत्म कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि अनुबंध में उन्हें भविष्य में नियमितीकरण की मांग न करने, बोनस और मेडिकल सुविधा जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी जैसी शर्तें शामिल की गई हैं।
Uttarakhand UPNL Employees- यह विवाद नया नहीं है, साल 2018 में उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया था कि उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया बनाई जाए और तब तक समान वेतन दिया जाए हालांकि, सरकार ने इसे लागू नहीं किया और मामला लंबे समय तक सर्वोच्च न्यायालय में लंबित रहा, अंततः सरकार की याचिका खारिज होने के बाद समान वेतन लागू हुआ लेकिन नियमितीकरण पर फैसला अभी भी अधूरा है।
उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने कहा कि अनुबंध श्रम कानूनों, ईपीएफ, ईएसआई और बोनस अधिनियम का उल्लंघन करता है और कर्मचारियों को बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति में डाल सकता है। संगठन ने अनुबंध को तत्काल रद्द करने और 10 साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की है।
Uttarakhand UPNL Employees- राजनीतिक स्तर पर भी गर्माया मुद्दा

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि उपनल कर्मचारियों के साथ धोखा किया जा रहा है और हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी की जा रही है।
सरकार की ओर से सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यदि कर्मचारी अनुबंध से असंतुष्ट हैं, तो सरकार उनके साथ बातचीत के लिए तैयार है और समाधान खोजने का प्रयास करेगी।
Uttarakhand UPNL Employees- फिलहाल समान कार्य के बदले समान वेतन का फैसला कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया था, लेकिन अनुबंध की नई शर्तों ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और कर्मचारी संवाद के माध्यम से समाधान निकाल पाते हैं या मामला अदालत और सड़क दोनों पर लंबी लड़ाई का रूप ले लेता है।
