Uttarakhand Saksharta Dar- देवभूमि उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। देवभूमि को बहुत जल्द देश का ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित किया जाएगा। प्रदेश की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है और इसके साथ ही उत्तराखंड ने केंद्र सरकार के कड़े साक्षरता मानकों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। आगामी कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक कदम से जुड़ा प्रस्ताव लाया जाएगा।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूर्ण साक्षर राज्य से संबंधित प्रस्ताव को बिना किसी देरी के शासन को भेजा जाए। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही इस प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए भारत सरकार के पास भेजा जाएगा।
Uttarakhand Saksharta Dar- उल्लास कार्यक्रम ने बदली तस्वीर
राज्य को इस मुकाम तक पहुंचाने में भारत सरकार के उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम की सबसे बड़ी भूमिका रही है। इस अभियान के तहत प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षर वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया।
- गांवों को लिया गोद: सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट जगत और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लिया गया।
वंचित समूहों पर विशेष फोकस: निरक्षर वयस्कों, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े व वंचित समूहों को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए।
कम साक्षरता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता: उन इलाकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया, जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से भी कम थी।

Uttarakhand Saksharta Dar- क्या हैं पूर्ण साक्षर बनने के पैमाने?
Uttarakhand Saksharta Dar- केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ कार्यक्रम के नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य को पूर्ण साक्षर का दर्जा तब मिलता है जब वहां 15 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाए, राज्य के सभी गैर-साक्षर लोगों तक बुनियादी शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया गया हो।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि अब तक देश के केवल पांच राज्य ही इस प्रतिष्ठित मुकाम को हासिल कर पाए हैं। उत्तराखंड यह उपलब्धि हासिल करने वाला देश का छठा राज्य बनेगा।
अब तक पूर्ण साक्षर घोषित राज्य:
- मिजोरम
- गोवा
- त्रिपुरा
- हिमाचल प्रदेश
- सिक्किम