Uttarakhand Hydropower Projects- उत्तराखंड की दो बड़ी बहुद्देशीय परियोजनाओं किसाऊ और लखवाड़ को नए साल में नई दिशा मिलने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन परियोजनाओं की देखरेख संभाल ली है और लगातार दोनों परियोजनाओं की समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
Uttarakhand Hydropower Projects- किसाऊ बांध परियोजना:
- किसाऊ बांध की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है।
- यह परियोजना 1940 के दशक में शुरू हुई थी, लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों और अन्य कारणों से 1996 में तैयार डीपीआर के बाद काम नहीं हो सका।
- वर्ष 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। नई डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की अनुमानित लागत 15 हजार करोड़ रुपये है।
- बृहस्पतिवार को गृह मंत्रालय की बैठक में यूजेवीएनएल और किसाऊ कारपोरेशन के एमडी डॉ. संदीप सिंघल ने भाग लिया।
- डीपीआर केंद्रीय मंजूरी और पर्यावरण स्वीकृतियों के बाद निर्माण चरण में आएगी।
- किसाऊ परियोजना के पूरा होने पर 660 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध होगा।
- परियोजना से 17 गांव जलमग्न होंगे और लगभग 1000 परिवारों का विस्थापन होगा।
Uttarakhand Hydropower Projects- लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना:
- लखवाड़ परियोजना को सरकार ने 1976 में मंजूरी दी थी, लेकिन काम 1992 में रोक दिया गया था।
- यह 300 मेगावाट की परियोजना यमुना नदी पर देहरादून के लोहारी गांव के पास 204 मीटर ऊंचे कंक्रीट बांध के माध्यम से संचालित होगी।
- इसके जल संग्रहण की क्षमता 330.66 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी और 33,780 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई संभव होगी।
- यमुना बेसिन के छह राज्यों को घरेलू, औद्योगिक और पीने के पानी के लिए 78.83 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा।
- परियोजना का काम नए साल में गति पकड़ने की संभावना है। इसे 2018 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। बजट का 90 प्रतिशत केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करेंगी।
- इससे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को सिंचाई के पानी के साथ गर्मियों में पेयजल की सुविधा भी मिलेगी।
Uttarakhand Hydropower Projects- केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार इन परियोजनाओं की समीक्षा कर रहा है, जिससे दोनों बहुद्देशीय परियोजनाओं का निर्माण समय पर और प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।