Jaunsar Bawar- जौनसार बावर की खत शैली के ग्रामीणों ने शुक्रवार को गांव दोहा में बैठक कर समाज हित के नौ महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए, बैठक की अध्यक्षता खत के सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने की, जिसमें 25 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए।
बैठक में तय किया गया कि अब वैवाहिक कार्यक्रमों में अंग्रेजी शराब, बियर और फास्ट फूड जैसे चाऊमीन, मोमो, टिक्की और चाट परोसे नहीं जाएंगे। महिलाओं के आभूषणों पर भी पाबंदी रहेगी नाक में फुली, कान में झुमकी या तूंगल और गले में कांडुडी या मंगलसूत्र ही पहन सकेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार के कार्यक्रम में खतवासी शामिल नहीं होंगे और संबंधित परिवार से एक लाख रुपये दंड वसूला जाएगा।
Jaunsar Bawar- बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चालदा महासू देवता का दोहा गांव से कचटा के लिए प्रस्थान दो वर्ष के प्रवास के बाद जून 2026 में किया जाएगा। 13 दिसंबर 2025 को ग्राम कचटा के खत कोरू के गणमान्य व्यक्तियों का एक दल दोहा आएगा और देवता के कार्यक्रम की रूपरेखा तय करेगा।
इसके अतिरिक्त, बारिया के जाग (परिवार में पहली शादी) में मौखी (मामा) द्वारा बकरा, आटा, चावल और कच्ची दारू दी जा सकेगी, लेकिन मिठाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसी तरह, रहिणी भोज में मिठाई और फल दिए जा सकते हैं, लेकिन ड्राई फ्रूट, उपहार या चांदी के सिक्के देना प्रतिबंधित रहेगा।
पूर्व में चकराता तहसील की ग्राम पंचायत खारसी, मानुवा, गेहरी और कंदाड़ में भी महिलाओं के आभूषणों पर पाबंदी के फैसले लिए जा चुके हैं, इसका उद्देश्य गांव में आर्थिक असमानता और दिखावे की भावना को कम करना, एकता और बराबरी की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
Jaunsar Bawar- जौनसार बावर के ग्रामीण इन फैसलों को समाज में नैतिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।