Arvind Pandey Letter- एक कथित पत्र को लेकर सोशल मीडिया पर फैला राजनीतिक विवाद आखिरकार स्पष्टता की ओर बढ़ गया है, जब अरविंद पांडेय ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर इसे पूरी तरह फर्जी करार दे दिया, इस मामले ने कुछ समय के लिए भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष दोनों के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ा दी थी।
सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पत्र को लेकर पार्टी के भीतर भी तुरंत सक्रियता देखी गई थी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक अरविंद पांडेय से बातचीत की थी और उनसे स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, पार्टी का रुख शुरू से ही यही था कि यदि पत्र वास्तविक है तो उसकी पुष्टि होनी चाहिए और यदि नहीं है तो उसे तुरंत खारिज किया जाए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
इसी बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इस कथित पत्र को लेकर भाजपा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया था, विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और जल्द स्पष्टता दी जानी चाहिए।
Arvind Pandey Letter- सोमवार को विधायक अरविंद पांडेय ने मीडिया के सामने आकर पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्र पूरी तरह फर्जी है और उनका उससे कोई संबंध नहीं है। पांडेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र न तो लिखा है और न ही जारी किया है। उन्होंने इसे उनकी छवि खराब करने की कोशिश बताया।

विधायक ने यह भी कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी प्रकार की अफवाहों को फैलाना गलत है और इससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स से अपील की कि ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच के बाद ही खबरों को आगे बढ़ाया जाए।
Arvind Pandey Letter- पार्टी स्तर पर भी विधायक के बयान के बाद स्थिति काफी हद तक साफ मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व पहले ही इस मामले में उनसे स्पष्टीकरण मांग चुका था, और अब उनके सार्वजनिक खंडन के बाद विवाद के शांत होने की संभावना बढ़ गई है।