Maa Katyayani Puja Vidhi
Maa Katyayani Puja Vidhi- शारदीय नवरात्रि के छठे दिन आज महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में प्रकट हुईं माँ कात्यायनी की पूरी भक्ति, निष्ठा और विधि-विधान के साथ आराधना की जा रही है। माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं और इन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। दुष्ट राक्षस महिषासुर का संहार करने के कारण इन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी उपासना से साधक को अद्भुत शक्ति, पराक्रम और निर्भीकता प्राप्त होती है।
षष्ठी तिथि के पावन अवसर पर आज मंदिरों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से युवतियों और सुहागिन महिलाओं ने माँ कात्यायनी का व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि माँ कात्यायनी की आराधना करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं शीघ्र दूर होती हैं और सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। साथ ही, सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माँ के दरबार में चारों ओर अद्भुत दिव्य ऊर्जा और श्रद्धालुओं का उल्लास नजर आ रहा है।
Maa Katyayani Puja Vidhi- माँ कात्यायनी की पूजन विधि
Maa Katyayani Puja Vidhi- माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना में विशेष नियमों का पालन किया जाता है:

- शुभ वस्त्र: षष्ठी तिथि पर पूजा के दौरान लाल या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
- पूजन सामग्री: माता के चरणों में लाल गुलाब या गुड़हल के पुष्प, रोली, कुमकुम और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
- विशेष भोग: माँ कात्यायनी को शहद (हनी) का प्रसाद अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि पूजा के दौरान माता को शहद अर्पित करने से जीवन में मिठास, आरोग्य और आकर्षण क्षमता बढ़ती है।
Maa Katyayani Puja Vidhi- शक्ति और सफलता प्राप्ति के लिए मंत्र
Maa Katyayani Puja Vidhi- पूजा-अनुष्ठान के समय धूप-दीप जलाकर साधक और श्रद्धालु पूरे भाव के साथ माँ कात्यायनी के इस प्रसिद्ध मंत्र का जाप करते हैं:
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
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