Uttarakhand Paddy Varieties
Uttarakhand Paddy Varieties- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (NBPGR) के वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने देश के 11 हिमालयी राज्यों से धान (चावल) की 9,172 पुरानी और पारंपरिक किस्मों का गहन अध्ययन किया है। इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों को धान की 1,906 अत्यंत दुर्लभ और उच्च क्षमता वाली ‘जैपोनिका’ (Japonica) किस्में मिली हैं। य
ह खोज आने वाले समय में चावल की उच्च पैदावार वाली संकर (हाइब्रिड) और प्रतिकूल मौसम को सहने में सक्षम फसलें तैयार करने में क्रांतिकारी साबित होगी।
Uttarakhand Paddy Varieties- इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
ICAR, NBPGR और सहयोगी संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह बहुप्रतीक्षित अध्ययन 28 सितंबर 2026 को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘Scientific Reports’ में प्रकाशित हुआ है। इस प्रतिष्ठित अनुसंधान दल में वैज्ञानिक आर. के. गौतम, ज्योति कुमारी, के. ए. अयाना, जी. डी. हरीश और सुमन रॉय समेत कई प्रमुख शोधकर्ता शामिल रहे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन दुर्लभ जैपोनिका किस्मों का उपयोग इंडिका किस्मों के साथ क्रॉस-ब्रीडिंग (संकरण) में किया जाएगा, जिससे ऐसी नई प्रजातियां विकसित की जा सकेंगी जो आसानी से उग सकें और जलवायु परिवर्तन के बीच भी भरपूर उत्पादन दे सकें।
यह अध्ययन उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बिहार, झारखंड, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा में पाई जाने वाली धान की किस्मों पर केंद्रित था।
- उत्तराखंड की स्थिति: राज्य से संग्रहित 1,698 किस्मों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 372 शुद्ध जैपोनिका और 432 मिश्रित प्रकार की किस्में दर्ज की गईं।
- अरुणाचल प्रदेश अव्वल: अध्ययन में सबसे अधिक जैपोनिका किस्म अरुणाचल प्रदेश में पाई गईं, जहां इनकी कुल संख्या 438 रही।
- अन्य प्रमुख राज्य: मिजोरम में 359 किस्में और मणिपुर में 206 जैपोनिका किस्में दर्ज की गईं।

Uttarakhand Paddy Varieties- फिनॉल रिएक्शन तकनीक से हुई पहचान
Uttarakhand Paddy Varieties- वैज्ञानिकों ने धान की इन हजारों किस्मों की प्राथमिक पहचान के लिए एक बेहद सटीक और किफायती फिनॉल रिएक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रयोग में धान के दानों को 2 प्रतिशत फिनॉल घोल (Phenol Solution) में 48 घंटे के लिए डुबोकर रखा गया:
- इंडिका किस्म: जिन दानों का रंग प्रतिक्रिया के बाद काला हो गया, उन्हें ‘इंडिका’ प्रकार माना गया।
- जैपोनिका किस्म: जिन दानों का मूल पीला रंग पूरी तरह बरकरार रहा, उन्हें ‘जैपोनिका’ श्रेणी में रखा गया।
- मिश्रित किस्म: जिन नमूनों में दोनों प्रकार के रंगीन दाने मिले, उन्हें ‘इंटरमीडिएट’ या मिश्रित प्रकार की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया।
Uttarakhand Paddy Varieties- यह शोध दर्शाता है कि उत्तराखंड और अन्य पर्वतीय राज्य देश में नई हरित क्रांति और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
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