Electricity Bill- गर्मी के बीच उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने जून माह के लिए ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (FPPCA) की नई दरें जारी कर दी हैं, जो 1 जून से 30 जून तक लागू रहेंगी।
यूपीसीएल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बिजली खरीद लागत में बढ़ोतरी के कारण विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। कंपनी बाजार से बिजली खरीदती है और जब यह खरीद नियामक आयोग द्वारा तय दरों से अधिक होती है तो उसका अंतर एफपीपीसीए के रूप में उपभोक्ताओं से वसूला जाता है वहीं, सस्ती बिजली मिलने की स्थिति में उपभोक्ताओं को राहत भी दी जाती है।
गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से यूपीसीएल को बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिसके चलते इस महीने एफपीपीसीए में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे मई के बाद जून में भी उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़े हुए आने की संभावना है।
मुख्य अभियंता (व्यावसायिक) एनएस बिष्ट द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नई दरों के अनुसार ही इस माह की बिलिंग की जाएगी। यह नियम उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा-45 के तहत लागू किया गया है।
Electricity Bill- हालांकि, ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं पर यह सरचार्ज लागू नहीं होगा। यूपीसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहली मीटर रीडिंग में एमआरआई (मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट) के मामलों में 1 जून से नई दरें लागू होंगी, जबकि अन्य मामलों में पुरानी और नई दरों का अनुपातिक समायोजन कर बिल तैयार किया जाएगा।

इसके अलावा, एफपीपीसीए को लो पावर फैक्टर सरचार्ज, वोल्टेज रिबेट, प्रीपेड मीटरिंग रिबेट या कंटीन्यूअस सप्लाई सरचार्ज की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
Electricity Bill- नई दरों का प्रभाव (प्रति यूनिट बढ़ोतरी)
- बीपीएल उपभोक्ता: 23 पैसे
- घरेलू उपभोक्ता: 59 से 65 पैसे
- अघरेलू: 90 से 94 पैसे
- सरकारी/पब्लिक यूटिलिटी: 89 पैसे
- प्राइवेट ट्यूबवेल: 29 पैसे
- कृषि गतिविधियां: 41 से 46 पैसे
- एलटी इंडस्ट्री: 82 से 87 पैसे
- एचटी इंडस्ट्री: 85 पैसे
- मिश्रित लोड: 84 पैसे
- रेलवे ट्रैक्शन: 82 पैसे
- ईवी चार्जिंग स्टेशन: 82 पैसे
- अस्थायी कनेक्शन: 1.01 रुपये प्रति यूनिट
Electricity Bill- बढ़ी हुई दरों के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में सीधा असर देखने को मिलेगा, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
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