Valley of Flowers- हर 15 दिन में रंग बदलती है उत्तराखंड की यह जादुई घाटी

Valley of Flowers- विश्व के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक नजारों में शुमार और जैवविविधता का अनमोल खजाना कही जाने वाली वैली ऑफ फ्लावर्स इन दिनों पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शीतकाल में बर्फ की सफेद चादर ओढ़े रहने वाली यह घाटी अब रंग-बिरंगे फूलों की मखमली वादियों में तब्दील हो चुकी है, जिसके दीदार के लिए देश-विदेश से सैलानियों का हुजूम उमड़ रहा है। इस सीजन में अब तक हजारों भारतीय पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी सैलानी भी यहां प्रकृति के इस अद्भुत रूप को निहारने पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें 20 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों का दीदार करने को मिल रहा है।

Valley of Flowers- पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद

इस वर्ष फूलों की घाटी में पर्यटकों का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार:

  • इस वर्ष की स्थिति: अब तक 2,698 भारतीय और 12 विदेशी पर्यटक घाटी का दीदार कर चुके हैं, जिससे नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को 4,90,000 रुपये की शानदार आय हुई है।
  • पिछले वर्ष से तुलना: पिछले साल शुरुआती 14 दिनों में केवल 1,427 पर्यटक यहां पहुंचे थे, जिससे प्रशासन को 2,73,100 रुपये का राजस्व मिला था। इस बार पर्यटकों की संख्या और आय दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Valley of Flowers- खिले हैं ये दुर्लभ फूल

87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस जादुई घाटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर 15 दिनों में फूलों की प्रजातियां बदल जाती हैं, जिससे पूरी घाटी का रंग और नजारा भी बदल जाता है। घाटी में 500 से अधिक प्रजातियों के फूल खिलते हैं। वर्तमान में पर्यटकों को इन मुख्य प्रजातियों के दीदार हो रहे हैं:

मुख्य आकर्षण: प्रिम्युला डेंटिकुलाटा, पोटेंटीला एट्रोसैंगुइनिया, रोडोडेंड्रोन कैम्पैन्युलेटम, रोडोडेंड्रोन लेपिडोटम, थाइमस (बन आजवाइन), कोबरा लिली (एरीसिमा), स्नेक लिली, कोरिडालिस काश्मीरियाना, आइरिस कुमाऊँ नेनसिस, एलियम ह्यूमाइल, फ्रिटिलेरिया रॉयली, वियोला बाइफ्लोरा, जैस्मिनम ह्यूमाइल, मार्श मैरीगोल्ड, सिरिंगा इमोडी, थर्मोप्सिस बारबाटा, लिलियम ऑक्सीपेटलम, एनीमोन और रतनजोत (अर्नेबिया बेंथमी)।

इसके साथ ही यह क्षेत्र कस्तुरा मृग, हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) और हिमालयन थार जैसे अत्यंत दुर्लभ और लुप्तप्राय जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास भी है।

Valley of Flowers

Valley of Flowers- गोविंदघाट से शुरू होता है सफर

घाटी की संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए प्रशासन ने यहां बेहद कड़े नियम लागू किए हैं:

  • यात्रा का मार्ग: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ज्योतिर्मठ के गोविंदघाट-पुलना से 10 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर बेस कैंप घांघरिया पहुंचा जाता है। इसके बाद घांघरिया से 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर फूलों की घाटी का दीदार होता है। सैलानियों को घाटी के भीतर केवल 5 किलोमीटर क्षेत्र तक ही जाने की अनुमति है।
  • नो-स्टे जोन (रुकने की मनाही): घाटी के भीतर पर्यटकों को रात में रुकने की बिल्कुल इजाजत नहीं है। सैलानियों को सुबह प्रवेश मिलता है और शाम 5 बजे तक बेस कैंप वापस लौटना अनिवार्य होता है।
  • खान-पान की व्यवस्था: घांघरिया से आगे पूरी घाटी में कोई भी खाद्य सामग्री या पानी की दुकान नहीं है। पर्यटकों को अपनी जरूरत का सामान और खाने-पीने की चीजें खुद साथ ले जानी पड़ती हैं। घाटी के बीच से बहने वाली पवित्र पुष्पावती नदी का साफ और शीतल पानी भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।

Valley of Flowers- रास्ता भूलने पर हुई थी खोज

फूलों की घाटी को 1982 में राष्ट्रीय पार्क और 2005 में यूनेस्को (UNESCO) ने विश्व धरोहर घोषित किया था। इस अनाम घाटी को दुनिया के नक्शे पर लाने का श्रेय ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेंक स्मिथ को जाता है।

वर्ष 1931 में कामेट पर्वत के अभियान से लौटते समय फ्रेंक स्मिथ रास्ता भूल गए और अचानक इस घाटी में पहुंच गए। यहां के अलौकिक सौंदर्य और फूलों को देखकर वे मंत्रमुग्ध हो गए।

इसके बाद वे 1937 में दोबारा यहां आए और वर्ष 1938 में उन्होंने ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ नामक विश्वप्रसिद्ध किताब लिखी। इसी किताब के बाद यह घाटी पूरी दुनिया में मशहूर हुई और आज भी विदेशी सैलानियों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है।

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