Tiger Shifting- उत्तराखंड के वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र से एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों का कुनबा बढ़ाने की मुहिम को एक और बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने कॉर्बेट नेशनल पार्क से पांच और बाघों को राजाजी ट्रांसफर करने के प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
- बाघों की संख्या: नए चरण में कुल 5 बाघ लाए जाएंगे, जिनमें 3 बाघिन (मादा) और 2 बाघ (नर) शामिल हैं।
- तकनीक का उपयोग: सभी बाघों का मेडिकल टेस्ट करने के बाद उन्हें सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा जाएगा, ताकि उनकी पल-पल की मूवमेंट ट्रैक हो सके।
- पहला चरण पूरा: मई 2025 में पांचवें बाघ को मोतीचूर रेंज में छोड़े जाने के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
Tiger Shifting- बाघ शिफ्टिंग की जरूरत?
Tiger Shifting- भौगोलिक रूप से राजाजी टाइगर रिजर्व गंगा नदी के कारण दो हिस्सों- पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बंटा हुआ है।
- पूर्वी क्षेत्र: यह हिस्सा कॉर्बेट नेशनल पार्क से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां बाघों की संख्या प्रचुर (वर्तमान में कुल 55 बाघ) है।
- पश्चिमी क्षेत्र: हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली और रामगढ़ जैसी 7 रेंजों में फैला यह क्षेत्र पूरी तरह से बाघ विहीन हो गया था।
- मानव निर्मित अवरोध: पश्चिमी क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन और शिकार उपलब्ध होने के बावजूद, चीला नहर, घनी सड़कें और रेलवे ट्रैक जैसे मानव निर्मित अवरोधों के कारण पूर्वी क्षेत्र के बाघ इस तरफ नहीं आ पा रहे थे। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए साल 2016 में बाघ शिफ्टिंग योजना का खाका तैयार किया गया, जिसे 2018 में NTCA से मंजूरी मिली।

Tiger Shifting- पहले चरण का सफरनामा
Tiger Shifting- बाघ पुनर्वास परियोजना के तहत कॉर्बेट से राजाजी के मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में अब तक लाए गए बाघों का सिलसिला इस प्रकार रहा है:
- 24 दिसंबर 2020: पहला बाघ (नर) मोतीचूर रेंज में सफलतापूर्वक शिफ्ट किया गया।
- 09 जनवरी 2021: पहली बाघिन (मादा) को मोतीचूर रेंज में छोड़ा गया।
- 20 मई 2023: दूसरी बाघिन (मादा) को पश्चिमी क्षेत्र के जंगल में रिलीज किया गया।
- 16 मार्च 2024: तीसरी बाघिन (मादा) को पश्चिमी क्षेत्र में शिफ्ट किया गया।
- 01 मई 2025: दूसरा बाघ (नर) मोतीचूर रेंज में छोड़ा गया, जिसके साथ ही इस परियोजना का पहला चरण समाप्त हुआ।
Tiger Shifting- चुनौतियां और उम्मीदें
Tiger Shifting- इस पूरी कवायद के बीच पार्क प्रशासन को कुछ बड़े झटके भी लगे हैं। वर्ष 2024 में यहां शिफ्ट की गई एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिससे पार्क प्रशासन में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हालांकि, इनमें से दो शावकों का गुलदार (तेंदुए) ने शिकार कर लिया, जबकि बाकी दो शावकों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इसके अलावा, पहले चरण में लाए गए 5 बाघों में से 3 के पार्क की सीमा से बाहर चले जाने की भी आशंका है, जिनमें से एक बाघ कभी-कभार ही पार्क के भीतर लौटता है।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए दूसरे चरण में लाए जा रहे 5 नए बाघों से पार्क प्रशासन को काफी उम्मीदें हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि नए कुनबे के आने से इस क्षेत्र में बाघों का प्राकृतिक प्रजनन तेज होगा और राजाजी देश के प्रमुख बाघ आवासों के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
“पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में पांच और बाघों को लाए जाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया गया था। NTCA ने इस पर अपनी सहमति दे दी है और जल्द ही लिखित मंजूरी मिलते ही आगे की आवश्यक प्रक्रियाएं और सॉफ्ट-रिलीज की तैयारी शुरू कर दी जाएगी।”- कोको रोशे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क
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