Tapt Kund Badrinath- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश के बाद बदरीनाथ धाम में तप्तकुंड के प्राकृतिक जल स्रोतों का अध्ययन शुरू हो गया है। भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान (IIRS) और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों की टीम मंदिर और आसपास के क्षेत्र में गर्म पानी के स्रोतों और जमीन की वास्तविक परिस्थितियों का निरीक्षण कर रही है।
यह कदम बदरीनाथ महायोजना के तहत रिवर फ्रंट और सुंदरीकरण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अक्टूबर 2025 में अलकनंदा नदी के किनारे रिवर फ्रंट के 150 मीटर क्षेत्र में काम रोक दिया गया था। स्थानीय निवासियों, हक़दारों और पुजारियों ने तप्तकुंड और नारदकुंड के जल स्रोतों को नुकसान पहुंचने और मंदिर की सुरक्षा पर खतरा होने की चिंता जताई थी।
Tapt Kund Badrinath- पीएमओ ने इसके बाद आईआईटी रुड़की, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और IIRS की टीमों को अध्ययन और कार्ययोजना तैयार करने का जिम्मा सौंपा। इसका उद्देश्य महायोजना के दौरान बदरीनाथ मंदिर और प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और यह देखना है कि प्राकृतिक स्रोत अपनी दिशा नहीं बदलें।
बदरीनाथ में मंदिर के आसपास कई प्राकृतिक जलस्रोत हैं। मुख्य पुजारी पूजा से पहले तप्तकुंड में स्नान करते हैं और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भी इसी जलधारा में स्नान करते हैं। नारदकुंड से ही आदि शंकराचार्य ने भगवान बदरी विशाल की मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया था।

Tapt Kund Badrinath- बदरीनाथ महायोजना के तीन चरण
- पहला चरण: सड़कों का विस्तार, झीलों का सुंदरीकरण और टूरिस्ट मैनजमेंट सेंटर का निर्माण।
- दूसरा चरण: रिवर फ्रंट का विकास, पुल निर्माण, ईवी ट्रेक, चिकित्सालय और तीर्थ पुरोहित आवास का निर्माण।
- तीसरा चरण: मंदिर के 75 मीटर गोलाकार क्षेत्र का सुंदरीकरण।
Tapt Kund Badrinath- अधिशासी अभियंता योगेश मनराल ने बताया कि विज्ञानियों के अध्ययन के बाद सुनिश्चित किया जाएगा कि महायोजना के कार्यों से मंदिर या प्राकृतिक जल स्रोतों को कोई नुकसान न पहुंचे, और श्रद्धालुओं तथा पुजारियों की दैनिक गतिविधाओं में बाधा न आए।