Rispana Bindal Elevated Road- ऋषिपना और बिंदाल नदियों पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए जारी भू-अधिग्रहण अधिसूचना को लेकर विरोध तेज हो गया है। दून समग्र विकास अभियान सहित कई जन संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार पर कानून की अनदेखी करने और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जन संगठनों का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले नदी तंत्र, पर्यावरणीय प्रभाव, बाढ़ के संभावित खतरे, मसूरी और मसूरी रोड पर पड़ने वाले असर को लेकर न तो कोई ठोस और वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया और न ही इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की गई। इसके बावजूद परियोजना को जनहित में बताकर भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
Rispana Bindal Elevated Road- दून समग्र विकास अभियान ने आरोप लगाया कि भू-अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अनिवार्य सामाजिक असर मूल्यांकन (Social Impact Assessment) और जनसुनवाई की प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि सामाजिक असर मूल्यांकन के नाम पर किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक या तकनीकी अध्ययन के बजाय आम लोगों से अनुमान आधारित राय ली गई।

संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस तथाकथित विशेषज्ञ रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें पर्यावरण, प्रदूषण, नदी प्रवाह या बाढ़ से जुड़े ठोस आंकड़ों का अभाव है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से केवल भूमि से संबंधित विवरण शामिल किए गए हैं, जिससे इसके उद्देश्य और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
जन संगठनों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया से प्रशासन और सरकार की मंशा संदिग्ध प्रतीत होती है। उनका आरोप है कि जब लगभग हर सप्ताह इस परियोजना के खिलाफ विरोध और आपत्तियां सामने आ रही हैं, तब जनता की आवाज को दबाकर और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए भू-अधिग्रहण अधिसूचना जारी करना एक स्पष्ट रूप से जनविरोधी कदम है।
Rispana Bindal Elevated Road- संगठनों और विपक्षी दलों ने मांग की है कि परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले पारदर्शी ढंग से विस्तृत पर्यावरणीय और सामाजिक अध्ययन कराया जाए, सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार हो और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।