One Nation One Tax- 1 जुलाई 2017, भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार, उसी दिन देश ने “एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार” की दिशा में साहसिक कदम बढ़ाया था। अब, आठ साल बाद, भारत ने 22 सितंबर 2025 से जीएसटी 2.0 युग की शुरुआत कर दी है, जिसमें कर प्रणाली को दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) और एक विशेष स्लैब (40%) में सरल बनाया गया है।
One Nation One Tax- जीएसटी सुधारों से नई कर क्रांति
- 2017 में 7.19 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रह अब बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। करदाताओं की संख्या भी 65 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो चुकी है जिससे लाखों छोटे उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं।
- नई संरचना में अब दैनिक आवश्यकताओं, दवाओं और शिक्षा सामग्री पर 0% से 5% तक जीएसटी लगेगा, जिससे परिवारों की जेब पर बोझ कम होगा। किसानों को भी बड़ा फायदा मिलेगा ट्रैक्टर, टायर, कीटनाशक और सिंचाई उपकरणों पर कम कर दर से इनपुट लागत घटेगी और ग्रामीण आय बढ़ेगी।
- ऑटो सेक्टर को राहत देते हुए, स्कूटर और कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है। वहीं 2,500 रुपये तक के रेडीमेड कपड़ों पर अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा।
- इसके विपरीत, पान मसाला, तंबाकू, ऑनलाइन गेम्स, लग्जरी एसयूवी और कैसिनो जैसे लग्जरी व डिमेरिट सामानों पर 40% स्लैब लागू किया गया है जिससे ‘फिट इंडिया, हेल्दी इंडिया’ की सोच को मजबूती मिली है।
One Nation One Tax- वस्त्र उद्योग को नई ऊर्जा: 2030 तक 350 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
- भारत का वस्त्र उद्योग वर्तमान में 179 बिलियन डॉलर का है और 4.6 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक इसे 350 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंचाया जाए।
- नई कर नीति ने फाइबर-न्यूट्रल व्यवस्था लागू करके लंबे समय से चले आ रहे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को खत्म किया है। अब मानव निर्मित रेशे, सूत और कपड़ों पर समान 5% जीएसटी लगेगा — जिससे कच्चे माल की लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा और उद्योग की प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा।
- यह बदलाव न केवल एमएसएमई सेक्टर को राहत देगा (जो वस्त्र उद्योग का 80% हिस्सा हैं), बल्कि भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
One Nation One Tax- जीएसटी 2.0 के फायदे एक नजर में
- आम जनता के लिए सस्ती आवश्यक वस्तुएं
- किसानों के इनपुट कॉस्ट में कमी
- ऑटो और वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा
- लग्जरी वस्तुओं पर उच्च कर से संतुलन
- निवेश, रोजगार और निर्यात में वृद्धि