Nanda Devi Raj Jat 2026- उत्तराखंड में 12 साल में एक बार आयोजित होने वाली मां नंदादेवी राजजात यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। यह यात्रा एशिया की सबसे कठिन और लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। इस बार प्रशासन न केवल श्रद्धालुओं की संख्या और पिछले अनुभवों के आधार पर रूपरेखा तैयार कर रहा है, बल्कि यात्रा के पर्यावरणीय पहलू और प्राकृतिक आपदा की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।
Nanda Devi Raj Jat 2026- कठिन और लंबी यात्रा
मां नंदादेवी राजजात यात्रा करीब 280 किलोमीटर लंबी है और श्रद्धालु इसे लगभग 19 से 20 दिनों में पैदल पूरा करते हैं। यात्रा में बुग्याल, उच्च हिमालय और कठिन रास्तों को पार करना शामिल है। यह कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों को जोड़ती है और धार्मिक महत्व की दृष्टि से इसे मां नंदा को उनके ससुराल भेजने की यात्रा माना जाता है।
उत्तराखंड अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र के पूर्व निदेशक और भूवैज्ञानिक एमपीएस बिष्ट ने बताया कि बुग्यालों में मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से घट रही है, जो इस क्षेत्र के इकोसिस्टम के लिए चुनौती है। उनके अनुसार, हजारों श्रद्धालुओं के जाने से पर्यावरण पर असर पड़ता है और इसलिए यात्रा की तैयारियों में इसे ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 9वीं सदी में इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा हुई थी, जिसमें करीब 600 लोग मारे गए थे, इसलिए उच्च हिमालय क्षेत्र में सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
Nanda Devi Raj Jat 2026- सुरक्षा तैयारियां
Nanda Devi Raj Jat 2026- इस बार जिला प्रशासन चमोली में केयरिंग कैपेसिटी अध्ययन कर रहा है ताकि अधिकतम श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित की जा सके। जिलाधिकारी गौरव कुमार और एसपी को पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए हैं। यात्रा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, पीएमजीएसवाई, शहरी विकास और स्वच्छता से जुड़े विभागों को कार्यों के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राथमिकता के आधार पर 20 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए गए हैं, जबकि विभिन्न विभागों के मिलाकर कुल 332 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कार्यों को A, B, C श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें पुलिया, रास्ते और अन्य बुनियादी ढांचा निर्माण शामिल हैं।

Nanda Devi Raj Jat 2026- यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मां नंदा देवी को भगवान शिव की पत्नी माना जाता है। राजजात यात्रा में श्रद्धालु मां नंदा के मायके (चमोली जिले के पट्टी चांदपुर और श्रीगुरु क्षेत्र) से उनके ससुराल (बधाण क्षेत्र) तक जाते हैं। यात्रा नौटी गांव से शुरू होती है और होमकुंड तक जाती है।
यात्रा का केंद्र आकर्षण चौसिंगिया खाड़ू कहलाने वाली काले रंग की भेड़ है। यह भेड़ राजजात यात्रा की अगुवाई करती है। नौटी में पूजा-अर्चना के दौरान भेड़ की पीठ पर पोटली (फंची) बांधी जाती है, जिसमें मां नंदा के श्रृंगार और श्रद्धालुओं की भेंट रखी जाती है। अंतिम क्षेत्र होमकुंड में इसे हिमालय की ओर रवाना किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक आपदा की तैयारी और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन यात्रा की हर बारीकी पर काम कर रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कठिन पर्वतीय रास्तों पर श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से यात्रा पूरी कर सकें।
धीराज गर्ब्याल, पर्यटन सचिव उत्तराखंड ने बताया कि यात्रा की तारीख जनवरी में तय की जाएगी और सभी तैयारियां बरसात के मौसम से पहले पूरी की जाएंगी, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव कर सकें।
Nanda Devi Raj Jat 2026- मां नंदादेवी राजजात यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह उत्तराखंड के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और पर्यटन दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।