Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home/u948756791/domains/himvarta.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170

Mana Village Uttarakhand- सरस्वती जल से आत्मनिर्भर बन रहे सीमांत गांव के लोग

Mana Village Uttarakhand- बदरीनाथ धाम के समीप स्थित देश के प्रथम गांव माणा में आस्था और रोजगार का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, तीर्थयात्रा सीजन के दौरान यहां बहने वाली पौराणिक सरस्वती नदी का जल स्थानीय लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है, श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा यह जल गांव के कई परिवारों की आजीविका का आधार बन चुका है।

यात्रा सीजन शुरू होते ही माणा गांव में भीम पुल से लेकर सतोपंथ ट्रैक तक स्थानीय युवा और महिलाएं सरस्वती नदी का जल विभिन्न आकार के डिब्बों में भरकर श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराते हैं, 20 रुपये से लेकर 300 रुपये तक की कीमत वाले इन डिब्बों की दिनभर अच्छी मांग रहती है, श्रद्धालु इस जल को पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और घर की सुख-समृद्धि के लिए अपने साथ ले जाते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार यात्रा काल के छह महीनों में गांव के 20 से अधिक परिवार इस कार्य से जुड़े रहते हैं। भीम पुल के पास जल बेचने वाले राहुल बिष्ट बताते हैं कि बदरीनाथ यात्रा उनके लिए सालभर की सबसे महत्वपूर्ण आय का स्रोत होती है, प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरस्वती नदी का जल खरीदते हैं, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी होती हैं।

मोनिका, अमन बड़वाल, लक्ष्मी बड़वाल और दीक्षा जैसे कई स्थानीय युवक-युवतियां भी यात्रा सीजन के दौरान माणा पहुंचकर जल बिक्री का कार्य करते हैं, उनका कहना है कि छह महीने तक चलने वाले इस कारोबार से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है, कई श्रद्धालु धार्मिक मान्यताओं के अलावा बच्चों के सेवन के लिए भी यह जल खरीदते हैं।

Mana Village Uttarakhand- स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सरस्वती नदी का जल घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है तथा दुख-दर्द दूर करने वाला माना जाता है, इसी आस्था के कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस जल को अपने घर लेकर जाते हैं, ग्रामीणों का दावा है कि एक परिवार यात्रा सीजन के दौरान दो से तीन लाख रुपये तक की कमाई कर लेता है।

Mana Village Uttarakhand

पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा बताते हैं कि माणा गांव उन चुनिंदा स्थानों में शामिल है जहां सरस्वती नदी प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है, यहां सरस्वती और अलकनंदा नदियों का संगम केशव प्रयाग के नाम से प्रसिद्ध है, श्रद्धालु पितरों के तर्पण और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी इस पवित्र जल को साथ ले जाते हैं।

सरस्वती नदी के निकट स्थित मानसूर तीर्थ का जलस्रोत भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, स्थानीय मान्यता है कि इस जल के आचमन से हकलाने की समस्या में लाभ मिलता है, पीतांबर मोल्फा का कहना है कि यदि इस जल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए और इसके गुणों की पुष्टि हो, तो यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है।

Mana Village Uttarakhand- बदरीनाथ यात्रा के साथ जुड़ी धार्मिक आस्था ने माणा गांव के लोगों को रोजगार का ऐसा माध्यम दिया है, जिसने सीमांत क्षेत्र के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *