IIT Roorkee Healthcare Conference- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी रुड़की ने हाल ही में “Global Disruptions in Healthcare and Development: Challenges, Innovations, and Pathways for the 21st Century” शीर्षक से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। यह आयोजन संस्थान की AHEAD प्रयोगशाला द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में नीति-प्रासंगिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना था।
सम्मेलन में स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलेपन क्षमता, जलवायु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य, वित्तीय जोखिम, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, तकनीकी रूपांतरण और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
आईआईटी रुड़की के अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिष्ठाता प्रोफेसर वी. सी. श्रीवास्तव, एम्स ऋषिकेश के हृदय रोग विभाग प्रमुख प्रोफेसर भानु दुग्गल, और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रोफेसर स्मिता झा ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और सामाजिक रूप से उत्तरदायी शासन में अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
IIT Roorkee Healthcare Conference- इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में प्रो. साबु पद्मदास (University of Southampton, UK), डॉ. मार्गरेट त्रियाना (World Bank), डॉ. सुमन सेठ (University of Leeds, UK), प्रो. प्रकाश सी कांडपाल (University of Southampton), और प्रो. दिब्येंदु मैती (Delhi School of Economics) शामिल थे। विश्व बैंक, University of Notre Dame (USA), IIT कानपुर, JNU, BHU और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
IIT Roorkee Healthcare Conference- सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार
सम्मेलन में प्रस्तुत शोध पत्रों का मूल्यांकन किया गया और सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार डॉ. बसंत के. पांडा (Population Council, भारत) और तनिषा (Lancaster University, UK) को प्रदान किया गया।
सम्मेलन के दौरान मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग ने “स्वास्थ्य और कल्याण में बड़े-पैमाने के डेटा विश्लेषण” पर पांच दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की, जिससे युवा शोधकर्ताओं और पेशेवरों की डेटा-आधारित विश्लेषणात्मक क्षमता को मजबूत किया गया।
IIT Roorkee Healthcare Conference- इस सम्मेलन ने अकादमिक शोध, नीति निर्माण और सामाजिक प्रभाव के बीच पुल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वास्थ्य व विकास के सामने खड़ी वैश्विक चुनौतियों पर बहुपक्षीय विमर्श को नई दिशा दी।


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