Maa Skandmata Puja Vidhi
Maa Skandmata Puja Vidhi- शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन आज भगवान कार्तिकेय की माता और करुणा की सजीव मूर्ति माँ स्कंदमाता की पूरी निष्ठा, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ उपासना की जा रही है। अपनी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय को बैठाए हुए माँ का यह स्वरूप अत्यंत मनमोहक, स्नेह से परिपूर्ण और करुणामयी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता अपने सभी भक्तों पर असीम ममता की वर्षा करती हैं तथा उन्हें ज्ञान, मोक्ष, सुख-समृद्धि और संतान सुख का वरदान प्रदान करती हैं।
आज पंचमी तिथि के अवसर पर देश भर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों और घरों में सुबह से ही विशेष अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं ने अपने परिवारों की सुख-शांति, घर-परिवार की रक्षा तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए माँ स्कंदमाता के चरणों में प्रार्थना की। मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और माता के जयकारों की गूंज से संपूर्ण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहाँ भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
Maa Skandmata Puja Vidhi- माँ स्कंदमाता की पूजन विधि
Maa Skandmata Puja Vidhi- माँ स्कंदमाता की पूजा का विधान अत्यंत सरल और फलदायी माना गया है:

- शुभ रंग और वस्त्र: आज के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करके माँ स्कंदमाता का पूजन करना अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है, क्योंकि पीला रंग ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक है।
- पूजन सामग्री: माता के चरणों में पीले पुष्प, कुमकुम, अक्षत और विशेष रूप से हल्दी की गांठ अर्पित की जाती है।
- विशेष भोग: माँ स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है। इसके साथ ही मिष्ठान का भोग लगाकर माता को प्रसन्न किया जाता है।
Maa Skandmata Puja Vidhi- मोक्ष प्राप्ति के लिए विशेष मंत्र
Maa Skandmata Puja Vidhi- पूजन के दौरान माता की प्रतिमा के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर धूप-दीप अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात माँ स्कंदमाता के इस पावन और सिद्ध मंत्र का पूरी श्रद्धा के साथ पाठ किया जाता है:
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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