Kalindi Khal Rescue
Kalindi Khal Rescue- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में कालिंदी खाल ट्रैक पर फंसे सभी 19 ट्रेकर्स और पोर्टर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया है। मंगलवार, 29 सितंबर को रेस्क्यू अभियान के दूसरे दिन बची हुई टीम को भी हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित हर्षिल हेलीपैड पहुंचाया गया। इसके साथ ही कालिंदी खाल क्षेत्र में चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, कालिंदी खाल क्षेत्र में खराब मौसम, बारिश-बर्फबारी और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हेलीकॉप्टर रेस्क्यू अभियान चलाया गया। 28 सितंबर को 11 ट्रेकर्स एवं पोर्टर्स को सुरक्षित निकालकर हर्षिल हेलीपैड लाया गया था। इसके बाद 29 सितंबर को शेष 8 लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे सभी 19 लोगों की निकासी पूरी हो गई। रेस्क्यू अभियान में एसडीआरएफ की हाई-एल्टीट्यूड टीम समेत विभिन्न एजेंसियां शामिल रहीं। हर्षिल हेलीपैड पर अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा समेत संबंधित अधिकारी और हेलीकॉप्टर पायलट मौजूद रहे। मौसम की स्थिति को देखते हुए टीमों ने आपसी समन्वय के साथ सुरक्षित निकासी की योजना तैयार की। 
Kalindi Khal Rescue- खराब मौसम के बीच चुनौतीपूर्ण रहा ऑपरेशन
Kalindi Khal Rescue- कालिंदी खाल क्षेत्र में लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण रेस्क्यू अभियान में मुश्किलें आईं। सोमवार को मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर संचालन प्रभावित हुआ था। मौसम में सुधार के बाद मंगलवार सुबह अभियान दोबारा शुरू किया गया और शेष लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हर्षिल पहुंचने के बाद रेस्क्यू किए गए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया, उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, जांच में उनका स्वास्थ्य सामान्य पाया गया।
Kalindi Khal Rescue- सीएम धामी लगातार कर रहे थे निगरानी

Kalindi Khal Rescue- रेस्क्यू अभियान के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से अधिकारियों को आवश्यक हवाई संसाधनों का इस्तेमाल करने और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। प्रशासन की प्राथमिकता खराब मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बीच सभी लोगों की सुरक्षित निकासी रही। कालिंदी खाल के अलावा उत्तरकाशी के अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी ट्रेकर्स के रेस्क्यू अभियान चलाए गए। अडेन/ऑडेन कॉल क्षेत्र से 29 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि अन्य हाई-एल्टीट्यूड ट्रैकिंग रूटों पर भी प्रशासन और बचाव एजेंसियां निगरानी एवं राहत कार्य में जुटी रहीं।
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