Waqf Board Investigation- एक ही पीर की कई मजारों पर सरकार सख्त

Waqf Board Investigation- उत्तराखंड में एक ही पीर के नाम से कई स्थानों पर मजारों के निर्माण के मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य वक्फ बोर्ड से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार ने वक्फ बोर्ड से यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रदेश में किन-किन स्थानों पर एक ही नाम से कई मजारें बनाई गई हैं और वे वैध हैं या अवैध।

वक्फ बोर्ड की प्रारंभिक जांच में सैयद कालू और बाबा भुवनशाह के नाम से कई मजारें बनाए जाने का मामला सामने आया है। जांच के अनुसार बाबा कालू के नाम से अल्मोड़ा, लोहाघाट (चंपावत), जसपुर (ऊधम सिंह नगर) और लामा चौड़ (हल्द्वानी) में कुल चार मजारें मौजूद हैं। वहीं बाबा भुवनशाह के नाम से काशीपुर और गदरपुर क्षेत्र में करीब दस मजारें पाए जाने की जानकारी मिली है।

वक्फ बोर्ड की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इनमें से कई मजारें उन लोगों द्वारा बनाई गई हैं, जो पाकिस्तान से आकर यहां बसे बताए जा रहे हैं, और कुछ मजारें निजी आवासों के भीतर स्थापित की गई हैं। एक ही पीर के नाम पर इतनी बड़ी संख्या में मजारें होने को लेकर वक्फ बोर्ड ने गहन जांच शुरू कर दी है।

Waqf Board Investigation- वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि जो मजारें या दरगाहें विधिवत रूप से वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर बनी हैं, उन्हें किसी भी हाल में नहीं छेड़ा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चंदा या उगाही के उद्देश्य से किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शम्स के अनुसार, केवल वही मजारें और दरगाहें वैध मानी जाएंगी, जो वक्फ बोर्ड की भूमि पर पंजीकृत रूप से निर्मित हैं। वक्फ की संपत्ति के बाहर बनी सभी मजारें अवैध की श्रेणी में आएंगी।

इधर, मसूरी में बुल्लेशाह की मजार को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री अजेय कुमार ने दावा किया है कि इस मजार के नीचे किसी पीर को दफन नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सूफी कवि बाबा बुल्लेशाह पाकिस्तान के कसूर शहर में रहते थे और वहीं उनकी असली मजार स्थित है। ऐसे में मसूरी में उनके नाम पर मजार बनाए जाने को उन्होंने संदेहास्पद बताया है।

Waqf Board Investigation-विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस मुद्दे को “देवभूमि के स्वरूप से खिलवाड़” करार देते हुए आरोप लगाया कि उत्तराखंड में वर्षों तक लैंड जिहाद के नाम पर सरकारी जमीनों पर कब्जे की साजिश चलती रही और पूर्ववर्ती सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने मांग की कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह का अभियान चलाकर जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धर्म की आड़ में सरकारी भूमि पर कब्जे का यह खेल कितनी गहराई तक फैला हुआ है।

Waqf Board Investigation- राज्य सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और अवैध निर्माणों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।

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