Vande Mataram- केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने पहली बार वंदे मातरम् के 6 छंदों को सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में बजाने या गाने को अनिवार्य कर दिया है, आदेश के मुताबिक, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को हमेशा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले प्रस्तुत किया जाएगा, और सभी उपस्थित लोग खड़े होकर सम्मानपूर्वक इसे सुनेंगे।
सरकार ने इस कदम के पीछे यह कारण रखा है कि गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसे राष्ट्रगान के समान गरिमा दी जाए। गृह मंत्रालय ने अपने 10-पृष्ठ के आदेश में स्पष्ट किया है कि 6 छंदों का पूरा संस्करण, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, अब कई महत्वपूर्ण सरकारी और आधिकारिक अवसरों पर अनिवार्य होगा।
Vande Mataram- इस आदेश को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि राज्यपालों और उनके भाषणों से पहले और बाद में, राष्ट्रीय गीत बजाना अनिवार्य होगा।
अधिकारिक रूप से यह कार्यक्रम तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान, राष्ट्रीय ध्वज परेड और सरकार द्वारा निर्देशित अन्य अवसर शामिल हैं। बैंड द्वारा वादन के समय पहले ढोल की थाप दी जाएगी, जो मार्चिंग ड्रिल के अनुसार 7 कदमों की होगी।

सामूहिक गायन वाले अवसरों में, राष्ट्रीय ध्वज फहराने, सांस्कृतिक कार्यक्रम और औपचारिक समारोहों में प्रशिक्षित गायक दल की व्यवस्था की जाएगी। गीत के बोल आवश्यकतानुसार मुद्रित रूप में वितरित किए जा सकते हैं।
Vande Mataram- विद्यालयों में भी दिन की शुरुआत सामूहिक गायन से की जा सकेगी। मंत्रालय ने जोर दिया है कि राष्ट्रीय गीत का गायन सम्मान और शिष्टाचार के साथ किया जाना चाहिए। यदि कोई समाचार फिल्म या वृत्तचित्र में गीत बजता है, तो दर्शकों को खड़ा होने की आवश्यकता नहीं होगी।
गृह मंत्रालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों को प्रस्तुत किया जाए, तो पहले राष्ट्रीय गीत गाया जाएगा। इस कदम से देश में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति एकरूप सम्मान और जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है।
Vande Mataram- आदेश में 6 छंदों का विवरण भी दिया गया है, जिसमें वन्दे मातरम् के सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् से लेकर त्वं हि शक्ति मातरम् तक सभी छंद शामिल हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि के प्रति सम्मान का प्रतीक माने जाते हैं।