Uttarakhand Traditional Art- अक्सर लोग पढ़ाई और नौकरी को सफलता का रास्ता मानते हैं, लेकिन कुछ युवा पारंपरिक विरासत और परिवार के व्यवसाय को नई पहचान देने के लिए अपने करियर की राह बदल लेते हैं, ऐसे ही उदाहरण हैं देहरादून की 20 वर्षीय श्रद्धा का, जिन्होंने जौनसार-बावर क्षेत्र की पारंपरिक कला को ग्लोबल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
श्रद्धा पहले एक होटल में लगभग 12 घंटे की नौकरी करती थीं, लेकिन उन्हें उसमें संतोष नहीं मिलता था। बचपन से उन्होंने अपने दादा और पिता को जौनसारी टोपियों और जैकेट पर काम करते देखा था। अपने पुश्तैनी व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए उन्होंने इसे अपनाया और पारंपरिक डिज़ाइन में आधुनिकता का तड़का लगाकर सोशल मीडिया के जरिए इसे वैश्विक बाजार में पेश किया।

Uttarakhand Traditional Art- उन्होंने महिलाओं की जौनसारी जैकेट पर रेशमी धागों से एंब्रॉयडरी करना शुरू किया, जिससे यह ट्रेडिशनल-एथनिक लुक का हिस्सा बन गई। अब ये जैकेट सिर्फ स्थानीय महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि वेस्टर्न ड्रेस पहनने वाली महिलाओं के लिए भी आकर्षक विकल्प बन गई हैं।
श्रद्धा ने बताया कि आज उनके हाथ से बनी ऊनी जैकेट और नक्काशीदार टोपियों की मांग अमेरिका और यूरोप में होने लगी है। चकराता घूमने आने वाले पर्यटक इन्हें खरीदकर ले जाते हैं और अपने रिश्तेदारों को भी भेजते हैं। उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि अपने दादा-परदादाओं के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
Uttarakhand Traditional Art- श्रद्धा के दादा, रूकमदास की बनाई टोपियां भारत के बड़े नेताओं जैसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं त्रिवेंद्र सिंह रावत के सिर को सज चुकी हैं। अब श्रद्धा इस विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रही हैं और अपने परिवार के साथ-साथ कारीगरों के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही हैं।