उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून से रुड़की जाते समय छुटमलपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी मुजतबा मलिक के निवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि उत्तराखंड कॉमन सिविल कोड, एक बहुत बड़ा दस्तावेज जो हमारे जीवन से संबंधित कई कानूनों व कई व्यवस्थाओं को लम्बे समय तक प्रभावित करेगा, अभी तक इसका ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं हुआ है। विपक्ष से उम्मीद की जा रही है कि उनको वह उसके पारण में विधानसभा में सहयोग करें अर्थात एक ऐसे ड्राफ्ट को पारित कर दें जिसको उन्होंने ठीक से पढ़ा भी नहीं और उसके विभिन्न प्रावधानों का क्या असर राज्य में रहने वाले लोगों के जीवन में पड़ेगा, विभिन्न वर्गों के जीवन में क्या असर पड़ेगा, उसका अध्ययन किए बिना, उसको समझे बिना, उस पर चिंतन किए बिना उसे पारित करें।
UCC बिल लाने के लिये उत्तराखण्ड सरकार बहुत जल्दी में है, उन्हें इस ड्राफ्ट में वोट नजर आ रहे हैं उन्हें राज्य के हित से वास्ता नहीं है, उनकी चिंता केवल चुनाव और वोट हैं। यह ड्राफ्ट आज के कई वर्तमान कानूनों को प्रभावित करेगा, कुछ नई व्यवस्थाएं खड़ी करेगा। क्या इस पहलू पर गहराई से व्यापक मंथन नहीं होना चाहिए? समाज पर उसका क्या असर पड़ेगा उसको समझे बिना राज्य के विपक्ष से उम्मीद की जा रही है कि वह भी उसको पारित करने में साथ दें, यदि विपक्ष ऐसा नहीं करेगा तो सरकार और भाजपा का पूरा प्रचार तंत्र उसको महिला विरोधी, हिंदू विरोधी, पता नहीं क्या-क्या विरोधी बताने में जुट जाएगा।
जरा आप सोचिये कि एक ऐसी व्यवस्था इस ड्राफ्ट के पारण के बाद राज्य में लागू होगी जो लंबे समय तक हमारे आपके, सबके जीवन को प्रभावित करेगी, उसे बिना पर्याप्त अध्ययन किये और उसके प्रभावों का मूल्यांकन किए बिना, उसका विरोध या समर्थन कैसे किया जा सकता है !! इस सत्र में उसको विधानमंडल के पटल पर रखिए, बिल लाना है तो बिल लाइए उसको भी विधानमंडल के पटल पर रखिए या ज्यादा जल्दी हो तो उसको बजट सत्र में उसको पारित करवा लीजिए, क्योंकि वैसे भी यह कॉमन सिविल कोड नहीं रह गया है!
आप राज्य की जनजातियों को इसके कार्य क्षेत्र से बाहर रखने जा रहे हैं। शायद सिख भाइयों को भी अब इसके कार्य क्षेत्र से बाहर रखेंगे, यह दोनों अच्छे निर्णय हैं। हम भी चाहते हैं कि लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी स्वरूप दिया जाए। इसका दुरुपयोग हो रहा है, महिलाओं को अधिकार देने के संबंधी कानूनों में हम भी सरकार के साथ निश्चित तौर पर खड़ा होना चाहेंगे।
