Swami Satyamitraanand Giri- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में शामिल हुए। यह समारोह भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि स्थल पर उनकी स्मृति में आयोजित किया गया था। यह समारोह तीन दिन तक चला और देशभर से श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि संत सदियों से हमारी सांस्कृतिक धारा के रक्षक रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश को संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में सोचना चाहिए। उनके अनुसार, संत परंपरा देश की सबसे बड़ी ताकत रही है और आज भी इसका संदेश प्रासंगिक है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें इस आयोजन में शामिल होने का अवसर मिला, जो उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को सनातन धर्म के ध्वजवाहक बताया। योगी ने कहा, “भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह ऋषियों की तपस्या और किसानों के श्रम से बना है। जहां धर्म है, वही विजय है। धर्म कभी कमजोर नहीं होता, लेकिन उसे कमजोर करने के षड्यंत्र होते रहे हैं।”
Swami Satyamitraanand Giri- योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब राज्य में न कर्फ्यू है और न ही दंगे। “जंगल राज खत्म हो चुका है, बेटियों को पूरी सुरक्षा मिल रही है और राज्य विकास के पथ पर अग्रसर है। जो पहले कठिन समय था, वहां आज भव्य राम मंदिर बन चुका है। माघ मेला पहले केवल कल्पवासियों तक सीमित था, लेकिन इस बार इसमें 21 करोड़ लोगों ने स्नान किया।”
उन्होंने उत्तराखंड के चार धाम, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या को राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बताया। योगी ने कहा कि ग्राम स्वराज भारत की मूल शक्ति था, जहां गुरुकुल और ऋषि आश्रम में कृषि, आयुर्वेद, प्रशासन और अन्य ज्ञान सिखाया जाता था। महात्मा गांधी ने भी ग्राम स्वराज को भारत की शक्ति बताया था। उन्होंने उल्लेख किया कि आक्रांताओं ने ग्राम स्वराज को नष्ट किया और किसानों को केवल करदाता बना दिया। “जब गांव टूटता है, तो राष्ट्र की नींव हिलती है।”
Swami Satyamitraanand Giri- समारोह में दोनों नेताओं ने संत परंपरा, संस्कृति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला और श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सांस्कृतिक चेतना और विकास एक साथ चल सकते हैं।