LT Teachers Promotion- उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों और प्रवक्ताओं की लंबे समय से लंबित पदोन्नति विवाद को लेकर दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट में संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 दिसंबर की तिथि निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी की जा चुकी है। इसके विपरीत, याचिकाकर्ताओं ने वरिष्ठता को लेकर एतराज जताया।
LT Teachers Promotion- सीधी भर्ती वाले शिक्षकों का तर्क था कि उनका चयन 2005 में हुआ है, इसलिए उन्हें वरिष्ठता में प्राथमिकता दी जाए, जबकि पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों ने कहा कि उनके सेवा वर्ष अधिक हैं, ऐसे में वरिष्ठता पहले उन्हें मिलनी चाहिए।
प्रदेश में एलटी और प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति का मामला कई वर्षों से लंबित है। शिक्षक लगातार सरकार से वरिष्ठता सूची और पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग करते रहे हैं।
LT Teachers Promotion- प्रधानाचार्य पद पर भी बड़ा विवाद
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से प्रधानाचार्य पद की सीधी भर्ती को निरस्त करने और इन पदों को पदोन्नति के माध्यम से ही भरने की मांग की, उनका कहना है कि वे कई दशकों से सेवा में हैं, लेकिन राज्य सरकार ने आज तक उनके अनुभव का लाभ देने पर विचार नहीं किया। कई वरिष्ठ शिक्षक तो सेवानिवृत्त होकर ग्रेच्युटी और पेंशन का लाभ भी पा चुके हैं, लेकिन पदोन्नति नहीं मिल पाई।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए भुवन कांडपाल मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उसी आधार पर उन्हें भी पदोन्नति मिलनी चाहिए, जैसा कि सरकार ने अन्य शिक्षकों को दी है।
LT Teachers Promotion- 1990 से सेवा, फिर भी कोई लाभ नहीं
याचिकाकर्ता शिक्षक त्रिविक्रम सिंह, लक्ष्मण सिंह खाती और अन्य ने कहा कि वे 1990 से सेवा दे रहे हैं, फिर भी उन्हें कैडर लाभ, पदोन्नति और वरिष्ठता का फायदा आज तक नहीं मिला, उनका आरोप है कि सरकार द्वारा लगातार अनदेखी की वजह से वर्षों की मेहनत का सही मूल्यांकन नहीं हो पा रहा।


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