Jyeshtha Maas 2026- साल 2026 में हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ माह का अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा, इस वर्ष चंद्र और सौर वर्ष के बीच अंतर के कारण कुल 13 महीने होंगे, चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है जबकि सौर वर्ष 365 दिन का। हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है और जब यह अंतर लगभग 30 दिन तक पहुँच जाता है, तब एक अतिरिक्त माह, यानी अधिक मास, जोड़ दिया जाता है।
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह महीना भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का विशेष समय होता है। पंडित दामोदर जोशी के अनुसार, इस दौरान “अधिक मास महात्म्य” का पाठ या कथा अवश्य करनी चाहिए। पूजा, हवन, जप, दान और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन इस समय विशेष पुण्यदायक होता है।
Jyeshtha Maas 2026- पौराणिक कथाओं में अधिक मास का संबंध हिरण्यकश्यप की कथा से भी जुड़ा है। ब्रह्मा जी के वरदान के कारण असुर राजा हिरण्यकश्यप न किसी मनुष्य, न किसी पशु से मारा जा सकता था, न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर। अत्याचार बढ़ने पर भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर संतुलन स्थापित किया। मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अधर्म का अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए अधिक मास का निर्माण किया।
पंडित जोशी के अनुसार, अधिक मास में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश या व्यापार की शुरुआत नहीं की जाती। यह समय मुख्य रूप से भक्ति, साधना और आत्मिक उन्नति के लिए समर्पित होता है।
अधिक मास में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। गरीबों को अन्न दान देना, जरूरतमंदों की सहायता करना, हवन करना, गीता का पाठ करना और भगवान विष्णु का नाम जपना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्य कई गुना फल देते हैं और जीवन में सुख-शांति लाते हैं।
Jyeshtha Maas 2026- इस प्रकार, 2026 का ज्येष्ठ अधिक मास किसी भी प्रकार का अशुभ समय नहीं है। यह महीने भक्तों के लिए आत्मिक शुद्धि, भक्ति और सेवा का श्रेष्ठ अवसर लेकर आता है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह दो बार आएगा एक सामान्य और एक अधिक मास जो सभी धर्मप्रेमियों को भक्ति, साधना और सकारात्मक कर्मों के लिए प्रेरित करेगा।