Harshika Rikhari

Harshika Rikhari- ‘रबर डॉल’ हर्षिका ने दिल्ली में योग की दुनिया में रचा इतिहास

Harshika Rikhari- उत्तराखंड की नन्हीं योग प्रतिभा हर्षिका रिखाड़ी, जिन्हें ‘रबर डॉल’ के नाम से भी जाना जाता है, ने दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल योग चैंपियनशिप 2025 में दो मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। महज 9 साल की उम्र में हर्षिका ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है और वह उत्तराखंड से प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अकेली प्रतिभागी थीं।

हल्द्वानी की हर्षिका ने यूनिवर्सल योग खेल महासंघ (UYSF) द्वारा आयोजित 4th World Cup Yoga Championship में हिस्सा लिया। इस चैंपियनशिप में 17 देशों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जस गोविन पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी की हर्षिका ने दो अलग-अलग श्रेणियों में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी योग प्रतिभा का लोहा मनवाया।

Harshika Rikhari- सिल्वर मेडल हर्षिका ने ट्रेडिशनल योग प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहकर जीता, जबकि आर्टिस्टिक योगा में तीसरे स्थान पर रहकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद हर्षिका को देशभर से बधाइयाँ मिल रही हैं।

हर्षिका के पिता भुवन रिखाड़ी ने बताया कि उनकी बेटी 5 साल की उम्र से मोबाइल पर योग की वीडियो देखकर अभ्यास करती थी। हर्षिका की रुचि को देखते हुए उन्हें योग अकादमी में दाखिला दिलाया गया, जहाँ उन्होंने कम समय में कठिन से कठिन आसनों में महारथ हासिल कर ली। पिता ने बताया कि हर्षिका का सपना था कि वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल लाए, और इस सपने को उन्होंने साकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में हर्षिका गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम और ऊँचा करेगी।

Harshika Rikhari- योग की दुनिया में अपनी काबिलियत के चलते हर्षिका को हल्द्वानी में ‘रबर डॉल’ के नाम से जाना जाता है। कम उम्र में हैरतअंगेज योग आसनों का प्रदर्शन कर चुकी हर्षिका अब तक 6 नेशनल प्रतियोगिताओं में 30 मेडल जीत चुकी हैं, जिनमें 15 गोल्ड मेडल शामिल हैं।

इंटरनेशनल प्रतियोगिता से चार दिन पहले हर्षिका को वायरल फीवर हुआ था, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। बावजूद इसके, प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की उनकी जिद और मेहनत ने दिल्ली में दो मेडल जीतने का सुनहरा मौका बनाया।

Harshika Rikhari- हर्षिका की यह उपलब्धि न केवल उसके माता-पिता और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।