Glacier Melting- हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे, भविष्य में पानी की कमी की आशंका

Glacier Melting- आईआईटी जम्मू और आईआईटी मंडी के हालिया अध्ययन में हिमालय में बर्फबारी में कमी और ग्लेशियरों के तेज पिघलने की चेतावनी दी गई है। अध्ययन में 1999 से 2016 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें पता चला कि सर्दियों में सामान्य से कम बर्फ गिर रही है और जो बर्फ गिर रही है, वह जल्दी पिघल रही है।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अनुसार उत्तराखंड, लद्दाख और जांस्कर के ग्लेशियर तेजी से अपना द्रव्यमान खो रहे हैं। उदाहरण के लिए, लद्दाख का पेंसिलुंगपा ग्लेशियर वर्ष 2015–2023 तक प्रति वर्ष 0.59 मीटर वाटर इक्विवेलेंट की दर से बर्फ खो रहा है, जबकि उत्तराखंड का चौराबाड़ी ग्लेशियर 0.7 मीटर प्रति वर्ष की दर से बर्फ कम कर रहा है। गंगोत्री ग्लेशियर पहले से ही 19 मीटर प्रति वर्ष की रफ्तार से पीछे खिसक रहा है।

विज्ञानी डॉ. मनीष मेहता का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के दिनों में कमी और समय में बदलाव आया है। 3,000 से 6,000 मीटर की ऊंचाई में बर्फ पिघलने की दर सर्वाधिक तेज है। इससे नदियों का प्रारंभिक बहाव बढ़ेगा, लेकिन बाद में क्षेत्र सूखे की ओर जाएगा।

Glacier Melting- ग्लेशियरों के लगातार पिघलने से हिमालयी क्षेत्रों में जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों में जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल रणनीति को तत्काल लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

 

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