RO का पानी सब पीते हैं, लेकिन क्‍या जानते हैं RO शब्द का सही मतलब

आजकल हर किसी के घर में आरओ  लगा होता है. हम उसी का पानी पीते हैं, क्योंकि जमीन का पानी या टोंटी से आया पाया अब उतना सुरक्षित नहीं रहा कि हम पी सकें. बड़े शहर ही नहीं, अब तो प्रदूषण की वजह से छोटे शहरों में भी आरओ की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा कि आखिर RO शब्द का सही मतलब है क्या? इसे यही नाम क्यों दिया गया? कई लोगों को इसके बारे में पता नहीं होगा. तो आइए जानते हैं RO शब्द का सही अर्थ। 

RO का फुल फॉर्म होता है रिवर्स ऑस्मोसिस हम सब जानते हैं कि आरओ दूषित पानी को साफ करने के लिए होता है. इस तकनीक से पानी के भीतर की सभी अशुद्धियां, मेटल पार्टिकल, बालू के कण, टीडीएस साफ हो जाती है. इस पूरी प्रक्रिया को हिन्दी में विपरीत प्रसारण कहते हैं. इसी से आरओ का नाम भी आया. इसे आप ऐसे समझें कि इंसानों और जानवरों के गुर्दे में भी रक्त से पानी को अवशोषित करने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस प्रक्रिया ही होती है. RO का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में करना चाहिए जहां पर पानी खारा हो या पानी में टीडीएस की मात्रा ज्यादा हो. तटीय क्षेत्रों और बोरवेल के लिए RO बिल्कुल सही होता. जिन स्थानों पर पानी मीठा होता है वहां पर UV purifier (Ultra Violet) का इस्तेमाल करना चाहिए.

अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर ये टीडीएस क्या है? तो बता दें कि TDS का पूरा नाम Total Dissolved Solid होता है. यानी पानी में घुले हुए वे कण, जिनकी वजह से स्वाद खराब हो जाता है. इनमें कैल्शियम, नाइट्रेट, आयरन, सल्फर और कार्बनिक यौगिक होते हैं. कुछ तो इनमें से सेहत के लिए भी हानिकारक होते हैं. RO तकनीक के जरिये पानी को कई तरह की झिल्ली से गुजारा जाता है, जिससे ये कण छन जाते हैं और पानी साफ हो जाता है। 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *